भोले तेरी जटा में, विराजे गंग माता।
नंदी तेरी सवारी, त्रिशूल हाथों में सजता॥
भोले तेरी जटा में, विराजे गंग माता...
डमरू तेरा बाजे, भस्म तेरा श्रृंगार।
सर्पों का हार गले में, तुझे सबसे है प्यार॥
भोले तेरी जटा में, विराजे गंग माता...
चंदा तेरी मस्तक पे, भूत-प्रेत तेरा संग।
तू ही तो है औघड़दानी, तुझसे ही है सब खुशहाल॥
भोले तेरी जटा में, विराजे गंग माता...
कैलाश पर्वत पर बसेरा, सदा तेरा धाम।
पार्वती संग प्यारा, तेरा ये रूप विशाल॥
भोले तेरी जटा में, विराजे गंग माता...
तू ही सृष्टि का करता, तू ही है संहारक।
तू ही पालनहार है, सबका तू उद्धारक॥
भोले तेरी जटा में, विराजे गंग माता...
तेरी महिमा अपरम्पार, तू ही है त्रिपुरारी।
संसार तुझे नमन करे, ओ महाकाल अविनाशी॥
भोले तेरी जटा में, विराजे गंग माता...
नंदी तेरी सवारी, त्रिशूल हाथों में सजता॥