चन्द्रघंटा माँ से अर्जी मेरी, मैं दास बनूँ तेरा, अब जैसे मर्जी तेरी, मैं दास बनूँ तेरा, अब जैसे मर्जी तेरी ॥ दस हाथ सुशोभित है, दस भुजा सुशोभित है, सोने सा रूप तेरा, जिस पर जग मोहित है, मैं दास बनूँ तेरा, अब जैसे मर्जी तेरी ॥ तू अति बलशाली है, माँ अति बलशाली है, दुष्टों का दमन करती, तेरी शान निराली है, मैं दास बनूँ तेरा, अब जैसे मर्जी तेरी ॥ जादू या अजूबा है, चंद्रघंटा सवारे दुनिया, जिसने माँ को पूजा है, मैं दास बनूँ तेरा, अब जैसे मर्जी तेरी ॥ तलवार कमंडल माँ, घंटे की प्रबल ध्वनि से, गूंजे भूमंडल माँ, मैं दास बनूँ तेरा, अब जैसे मर्जी तेरी ॥ भोग दूध शहद भाता, बस पूजन अर्चन से, दुःख निकट नहीं आता, मैं दास बनूँ तेरा, अब जैसे मर्जी तेरी ॥ तेरी पूजा खुशहाली है, हे मात चंद्रघंटा, तेरी शान निराली है, मैं दास बनूँ तेरा, अब जैसे मर्जी तेरी ॥ दुःख ‘अनुज’ का भी हरती, शरणागत की रक्षा, ‘देवेन्द्र’ सदा करती, मैं दास बनूँ तेरा, अब जैसे मर्जी तेरी ॥ चन्द्रघंटा माँ से अर्जी मेरी, मैं दास बनूँ तेरा, अब जैसे मर्जी तेरी, मैं दास बनूँ तेरा, अब जैसे मर्जी तेरी ॥
भजन : चन्द्रघंटा माँ से अर्जी मेरी
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