हर माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब यह तिथि शनिवार को पड़ती है तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के साथ-साथ शनि देव की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष महत्व रखता है। इस व्रत को करने से जीवन में आ रही कठिनाइयाँ दूर होती हैं और शनि दोष का निवारण होता है।
शनि प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
शास्त्रों में शनि प्रदोष व्रत को अत्यंत फलदायी माना गया है। इस दिन व्रत रखने और शिवजी के साथ शनि देव की पूजा करने से दुर्भाग्य दूर होता है और जीवन में उन्नति के मार्ग खुलते हैं। विशेष रूप से जिन व्यक्तियों की कुंडली में शनि की महादशा, साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही होती है, उनके लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी होता है।पूजा विधि
- सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
- शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, और पुष्प अर्पित करें।
- शाम के समय भगवान शिव और शनि देव की संयुक्त पूजा करें।
- "ॐ नमः शिवाय" और "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का जप करें।
- प्रदोष व्रत की कथा का श्रवण करें और आरती करें।
शनि प्रदोष व्रत से मिलने वाले लाभ
- शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति मिलती है।
- पारिवारिक जीवन में शांति और स्थिरता आती है।
- करियर और व्यवसाय में सफलता प्राप्त होती है।
- रोग और बाधाओं का निवारण होता है।
- मन में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
आगामी प्रदोष व्रत की तिथियाँ
- 02 दिसंबर 2025, मंगलावर भौम प्रदोष व्रत
- 17 दिसंबर 2025, बुधवार बुध प्रदोष व्रत
- 01 जनवरी 2026, गुरुवर गुरु प्रदोष व्रत
- 16 जनवरी 2026, शुक्रवार शुक्र प्रदोष व्रत
- 30 जनवरी 2026, शुक्रवार शुक्र प्रदोष व्रत
- 14 फरवरी 2026, शनिवार शनि प्रदोष व्रत
- 01 मार्च 2026, रविवर रवि प्रदोष व्रत