30 Nov 2025 आध्यात्मिक मार्गदर्शन विश्वसनीय जानकारी

मासिक कार्तिगाई

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मासिक कार्तिगाई (मासिक कार्तिगई) एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है, जिसे मुख्यतः तमिलनाडु और केरल में मनाया जाता है। यह त्योहार कार्तिगई नक्षत्र के दिन मनाया जाता है, जो प्रत्येक मास में आता है। विशेष रूप से कार्तिगाई दीपम के रूप में मनाया जाने वाला यह त्योहार भगवान शिव और भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) की पूजा का प्रतीक है। मासिक कार्तिगाई का पालन श्रद्धा और भक्ति के साथ करने से भगवान शिव और भगवान मुरुगन की कृपा प्राप्त होती है और सभी प्रकार के कष्टों का नाश होता है। मासिक कार्तिगाई त्योहार भगवान शिव और भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) की आराधना का महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व प्रत्येक महीने कार्तिगाई नक्षत्र के दिन मनाया जाता है और विशेष रूप से तमिलनाडु और केरल में यह त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस त्योहार की कहानी भगवान शिव, पार्वती, और उनके पुत्र भगवान मुरुगन से जुड़ी हुई है।

मासिक कार्तिगाई की कहानी

एक बार की बात है, देवी पार्वती ने भगवान शिव से एक पुत्र की इच्छा व्यक्त की। भगवान शिव ने देवी पार्वती की प्रार्थना स्वीकार की और अपनी दिव्य शक्ति से छह दिव्य चिंगारियों का सृजन किया। ये चिंगारियां सरवणापोई नामक सरोवर में गिरीं और वहां से छह सुंदर बालकों का जन्म हुआ। ये बालक दिव्य तेज और शक्ति से परिपूर्ण थे। देवी पार्वती ने उन सभी बालकों को एकत्र किया और उन्हें अपने आलिंगन में लेकर एक ही बालक के रूप में मिला दिया। इस प्रकार, भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) का जन्म हुआ। भगवान मुरुगन की छह मुख वाली स्वरूपा इस घटना का प्रतीक है। भगवान मुरुगन का जन्म कार्तिगाई नक्षत्र के दिन हुआ था, इसलिए इस दिन को कार्तिगाई दीपम के रूप में मनाया जाता है। कार्तिगाई दीपम का अर्थ है "कार्तिगाई का दीपक," और यह त्योहार दीप जलाकर भगवान मुरुगन की पूजा और आराधना के लिए मनाया जाता है।

मासिक कार्तिगाई का महत्व

  • यह व्रत भगवान शिव और भगवान कार्तिकेय दोनों को प्रसन्न करता है।
  • भक्त को साहस, शक्ति और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।
  • यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो संतान सुख और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना करते हैं।
  • नियमित मासिक कार्तिगाई व्रत करने से संपत्ति, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

पूजन विधि

  • प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
  • घर में या मंदिर में दीप जलाएँ (घी का दीपक श्रेष्ठ माना जाता है)।
  • भगवान शिव और भगवान कार्तिकेय की मूर्ति/प्रतिमा का पूजन करें।
  • लाल और पीले पुष्प, चंदन और फल अर्पित करें।
  • "ॐ कार्तिकेयाय नमः" या "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप करें।
  • संध्या के समय अधिक से अधिक दीपक प्रज्वलित करें।

मासिक कार्तिगाई व्रत के लाभ

  • जीवन में नकारात्मक ऊर्जा और बाधाएँ दूर होती हैं।
  • घर-परिवार में सौभाग्य और सुख-शांति का वास होता है।
  • संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वालों के लिए यह व्रत फलदायी है।
  • रोगों और भय से मुक्ति मिलती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति और आत्मबल की वृद्धि होती है।

मासिक और वार्षिक कार्तिगाई में अंतर

  • वार्षिक कार्तिगाई दीपम विशेष रूप से कार्तिक मास में मनाया जाता है, जिसमें मंदिरों और घरों में असंख्य दीप जलाए जाते हैं।
  • मासिक कार्तिगाई हर माह कार्तिगाई नक्षत्र के दिन किया जाने वाला व्रत है।
  • दोनों ही पूजन विधियाँ समान हैं, लेकिन वार्षिक कार्तिगाई का महोत्सव अधिक व्यापक और भव्य होता है।
मासिक कार्तिगाई व्रत करने से भक्त के जीवन में सकारात्मकता, शक्ति और समृद्धि का संचार होता है। भगवान कार्तिकेय और भगवान शिव की कृपा से सभी कष्ट दूर होकर भक्त का जीवन आनंदमय बनता है।
आगामी मासिक कार्तिगाई की तिथियाँ
  • 31 दिसंबर 2025, बुधवार
  • 27 जनवरी 2026, मंगलावर
  • 23 फरवरी 2026, सोमवार
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