30 Nov 2025 आध्यात्मिक मार्गदर्शन विश्वसनीय जानकारी

श्री कृष्णाष्टकम्

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वसुदेव सुतं देवंकंस चाणूर मर्दनम् । देवकी परमानन्दंकृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥१॥ अतसी पुष्प सङ्काशम्हार नूपुर शोभितम् । रत्न कङ्कण केयूरंकृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥२॥ कुटिलालक संयुक्तंपूर्णचन्द्र निभाननम् । विलसत् कुण्डलधरंकृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥३॥ मन्दार गन्ध संयुक्तंचारुहासं चतुर्भुजम् । बर्हि पिञ्छाव चूडाङ्गंकृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥४॥ उत्फुल्ल पद्मपत्राक्षंनील जीमूत सन्निभम् । यादवानां शिरोरत्नंकृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥५॥ रुक्मिणी केलि संयुक्तंपीताम्बर सुशोभितम् । अवाप्त तुलसी गन्धंकृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥६॥ गोपिकानां कुचद्वन्द्वकुङ्कुमाङ्कित वक्षसम् । श्रीनिकेतं महेष्वासंकृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥७॥ श्रीवत्साङ्कं महोरस्कंवनमाला विराजितम् । शङ्खचक्रधरं देवंकृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥८॥ कृष्णाष्टक मिदं पुण्यंप्रातरुत्थाय यः पठेत् । कोटिजन्म कृतं पापंस्मरणेन विनश्यति ॥ ॥ इति श्री कृष्णाष्टकम् सम्पूर्णम् ॥
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