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आरती

माता विन्ध्येश्वरी आरती: सुन मेरी देवी

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सुन मेरी देवी पर्वतवासनी । कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥
पान सुपारी ध्वजा नारियल । ले तेरी भेंट चढ़ायो माँ ॥
सुन मेरी देवी पर्वतवासनी । कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥

सुवा चोली तेरी अंग विराजे । केसर तिलक लगाया ॥
सुन मेरी देवी पर्वतवासनी । कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥
नंगे पग मां अकबर आया । सोने का छत्र चडाया ॥
सुन मेरी देवी पर्वतवासनी । कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥

ऊंचे पर्वत बनयो देवालाया । निचे शहर बसाया ॥
सुन मेरी देवी पर्वतवासनी । कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥
सत्युग, द्वापर, त्रेता मध्ये । कालियुग राज सवाया ॥
सुन मेरी देवी पर्वतवासनी । कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥

धूप दीप नैवैध्य आर्ती । मोहन भोग लगाया ॥
सुन मेरी देवी पर्वतवासनी । कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥
ध्यानू भगत मैया तेरे गुन गाया । मनवंचित फल पाया ॥
सुन मेरी देवी पर्वतवासनी । कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥

जय माँ विन्ध्येश्वरी!

माता विन्ध्येश्वरी आरती का महत्व

माँ विंध्यवासिनी को शक्ति और संकट हरने वाली देवी माना जाता है। उनकी आरती करने से सभी प्रकार के दुख, भय और बाधाएँ दूर होती हैं।

सुख, समृद्धि और शांति

माँ की कृपा से जीवन में धन, ऐश्वर्य और सकारात्मकता बनी रहती है। घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि

यह आरती माँ दुर्गा के एक रूप, माँ विन्ध्येश्वरी को समर्पित है, जो शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक हैं। इस आरती से मनोबल बढ़ता है और व्यक्ति को नए कार्यों में सफलता मिलती है।

नवरात्रि और विशेष अवसरों पर माँ की कृपा

नवरात्रि, पूर्णिमा और शुक्रवार को इस आरती का विशेष महत्व होता है। इसे गाने से माँ का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में शुभता आती है।

माता विन्ध्येश्वरी आरती करने के लाभ

  1. जीवन की सभी बाधाएँ दूर होती हैं।
  2. मन की शांति और आत्मबल प्राप्त होता है।
  3. धन-वैभव और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
  4. नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और घर में शुभता आती है।
  5. माँ की कृपा से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

जय माता दी!