श्री सत्यनारायण जी की आरती भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की आराधना के लिए गाई जाती है। सत्यनारायण व्रत और पूजा के समापन पर भगवान की आरती करने की परंपरा है। भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ आरती गाकर भगवान सत्यनारायण से सुख, शांति, समृद्धि और परिवार के मंगल की प्रार्थना करते हैं।
सत्यनारायण पूजा विशेष रूप से पूर्णिमा, शुभ अवसरों, विवाह, गृह प्रवेश और अन्य धार्मिक आयोजनों पर की जाती है। पूजा के बाद कथा श्रवण और प्रसाद वितरण के साथ आरती की जाती है।
श्री सत्यनारायण जी की आरती का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान सत्यनारायण सत्य, धर्म और भगवान विष्णु के स्वरूप से जुड़े हैं। सत्यनारायण व्रत कथा में श्रद्धा और सत्य आचरण के महत्व का वर्णन मिलता है।
आरती के दौरान भगवान की महिमा का स्मरण किया जाता है और भक्त उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
श्री सत्यनारायण जी की आरती — पूर्ण पाठ
जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
रत्न जड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि राजै।
नारद करत निराजन, घंटा ध्वनि बाजै॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
प्रकट भये कलि कारण, द्विज को दर्श दियो।
बूढ़ा ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
दुर्बल भील कठारो, जिन पर कृपा करी।
चन्द्रचूड़ एक राजा, तिनकी विपत्ति हरी॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीन्ही।
सो फल भोग्यो प्रभुजी, फिर स्तुति कीन्हीं॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
भाव भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धरयो।
श्रद्धा धारण कीन्हीं, तिनको काज सरयो॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
ग्वाल-बाल संग राजा, वन में भक्ति करी।
मनवांछित फल दीन्हों, दीनदयाल हरी॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
चढ़त प्रसाद सवायो, कदली फल, मेवा।
धूप दीप तुलसी से, राजी सत्यदेवा॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
श्री सत्यनारायण जी की आरती, जो कोई नर गावै।
ऋद्धि-सिद्ध सुख-संपत्ति, सहज रूप पावे॥
जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा॥
सत्यनारायण पूजा में आरती का स्थान
श्री सत्यनारायण व्रत एवं पूजा में भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप का पूजन किया जाता है। पूजा के बाद सत्यनारायण व्रत कथा का श्रवण किया जाता है और अंत में भगवान की आरती की जाती है।
आरती के बाद भगवान को प्रसाद अर्पित करके उपस्थित भक्तों में प्रसाद वितरित किया जाता है।
श्री सत्यनारायण जी की पूजा की सामान्य विधि
सत्यनारायण पूजा में परिवार की परंपरा के अनुसार विधि अलग हो सकती है। सामान्य रूप से पूजा में निम्न चरण शामिल होते हैं:
पूजा स्थान की साफ-सफाई करें।
भगवान सत्यनारायण या भगवान विष्णु की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें।
कलश की स्थापना करें।
भगवान को पुष्प, अक्षत, चंदन और तुलसी दल अर्पित करें।
फल, मिठाई और अन्य नैवेद्य अर्पित करें।
सत्यनारायण व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
भगवान की आरती करें।
प्रसाद का वितरण करें।
सत्यनारायण जी को क्या प्रसाद चढ़ाया जाता है?
सत्यनारायण पूजा में पंचामृत, केला, अन्य फल, मेवा और विशेष रूप से बनाया गया प्रसाद अर्पित करने की परंपरा है। कई परिवारों में आटे, चीनी, घी और केले आदि से प्रसाद तैयार किया जाता है।
प्रसाद की सामग्री और विधि स्थानीय एवं पारिवारिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।
सत्यनारायण जी की आरती कब करें?
सत्यनारायण पूजा और कथा के समापन के बाद भगवान की आरती की जाती है। आरती के दौरान परिवार के सभी सदस्य और पूजा में शामिल भक्त श्रद्धा से भगवान का स्मरण करते हैं।
श्री सत्यनारायण जी का मंत्र
भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की पूजा में विष्णु मंत्र का जाप किया जा सकता है:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
इसके अतिरिक्त भगवान सत्यनारायण का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक ॐ सत्यनारायणाय नमः का जाप भी किया जा सकता है।
श्री सत्यनारायण जी की आरती सत्यनारायण पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आरती के माध्यम से भक्त भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की स्तुति करते हैं और परिवार के सुख, शांति, समृद्धि तथा मंगल की प्रार्थना करते हैं। श्रद्धा से पूजा, कथा, आरती और प्रसाद वितरण करने की परंपरा अनेक परिवारों में प्रचलित है।
ॐ जय लक्ष्मी रमणा।
श्री सत्यनारायण भगवान की जय।