॥ जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी॥
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
॥जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी॥
श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी।
नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥
॥जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी॥
किरीट मुकुट शीश रजित दीपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
॥जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी॥
मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
॥जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी॥
देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥
॥जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी॥
शनि देव की आरती का महत्व
कष्टों और दुर्भाग्य से मुक्ति
शनि देव की आरती करने से शनि की महादशा, साढ़े साती और ढैय्या के प्रभाव से राहत मिलती है। जीवन में आने वाली बाधाओं, कष्टों और दुर्भाग्य से बचाव होता है।न्याय और कर्म का उचित फल
शनि देव न्याय के देवता हैं, उनकी आरती करने से व्यक्ति को अपने कर्मों का उचित फल प्राप्त होता है। जो सच्चाई और ईमानदारी से जीवन व्यतीत करता है, उसे शनि देव का विशेष आशीर्वाद मिलता है।नकारात्मक ऊर्जा और शत्रु बाधा से रक्षा
शनि देव की कृपा से नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नजर और शत्रु बाधा दूर होती है। आरती करने से आत्मबल और मानसिक शांति प्राप्त होती है।रोजगार, व्यापार और सफलता में वृद्धि
शनि देव की आरती करने से करियर और व्यापार में स्थिरता और उन्नति मिलती है। बेरोजगारी, आर्थिक संकट और ऋण से मुक्ति के लिए भी शनि देव की आरती लाभदायक होती है।गंभीर रोगों और स्वास्थ्य समस्याओं से राहत
शनि देव की आरती करने से पुराने रोग, मानसिक तनाव और शारीरिक कष्टों से छुटकारा मिलता है। विशेष रूप से हड्डियों और नसों से जुड़ी समस्याओं में शनि देव की आरती करना लाभकारी होता है।शनि देव की आरती कब करें?
- शनिवार को विशेष रूप से शनि देव की आरती करनी चाहिए।
- संध्या काल में पीपल के पेड़ के नीचे दीप जलाकर आरती करने से अधिक लाभ मिलता है।
- शनि जयंती, साढ़े साती, ढैय्या, या किसी ग्रह दोष की स्थिति में आरती करना शुभ माना जाता है।
- काले तिल, सरसों के तेल का दीपक जलाकर आरती करने से शनि देव की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।
आरती के साथ कौन से मंत्र और उपाय करें?
- "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें।
- पीपल के वृक्ष की पूजा करें और तेल का दीपक जलाएं।
- गरीबों को काले तिल, उरद दाल, काले कपड़े और तेल का दान करें।
- शनि मंदिर में जाकर दर्शन और हनुमान चालीसा का पाठ करें।