लोहड़ी की कहानी
लोहड़ी उत्तर भारत और पंजाब का एक पारंपरिक फसल उत्सव है जो सर्दियों के अंत और फसल कटाई का प्रतीक है। यह पर्व दुल्ला भट्टी की कहानी से जुड़ा है, जो एक नायक थे और उन्होंने गरीबों की मदद की। इस पर्व का मुख्य आकर्षण बोनफायर है, जो गर्मजोशी, समृद्धि और नई फसल का प्रतीक है। लोग दुल्ला भट्टी की प्रशंसा में लोकगीत गाते हैं और उनकी वीरता और उदारता को याद करते हैं।
लोहड़ी का महत्व
लोहड़ी का सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से बहुत महत्व है। यह नई फसल कटाई के उत्सव के साथ-साथ प्रकाश और अंधकार के बीच जीत का प्रतीक है। यह पर्व परिवार और समुदाय को एकजुट करता है। नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं के लिए यह पर्व विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह नई शुरुआत और उज्जवल भविष्य का प्रतीक है।
लोहड़ी मनाने की विधि
बोनफायर जलाना
बोनफायर लोहड़ी का मुख्य केंद्र है। परिवार और समुदाय इसके चारों ओर इकट्ठा होते हैं और तिल, गुड़ और पॉपकॉर्न चढ़ाते हैं। यह प्रक्रिया प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने और समृद्धि की कामना का प्रतीक है।
लोकगीत और नृत्य
लोहड़ी में गीत और नृत्य का विशेष महत्व है। लोग पंजाबी लोकगीत गाते हैं और भांगड़ा और गिद्दा नृत्य करते हैं। यह संगीत और नृत्य उत्सव के आनंद और सामुदायिक भावना को दर्शाते हैं।
पारंपरिक व्यंजन
लोहड़ी का उत्सव स्वादिष्ट व्यंजनों के बिना अधूरा है। मक्के की रोटी, सरसों का साग, तिल लड्डू और गजक जैसे व्यंजन परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर खाए जाते हैं। ये व्यंजन नई फसल की ताजगी और खुशहाली को दर्शाते हैं।
Upcoming Lohri date
- 14 January 2027, Thursday