ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य स्वाहा:॥
मंत्र का अर्थ एवं महत्व
यह एक श्री गणेश बीज मंत्र है, जिसे सौभाग्य, समृद्धि और सफलता प्राप्त करने के लिए जपा जाता है। इस मंत्र में भगवान गणेश के विभिन्न शक्तिशाली बीजाक्षरों (श्रीं, गं) का समावेश किया गया है, जो जीवन में शुभता और बाधाओं को दूर करने में सहायक माने जाते हैं।
मंत्र का अर्थ
- ॐ – ब्रह्मांड की ऊर्जा और दिव्यता का प्रतीक।
- श्रीं – लक्ष्मी बीज मंत्र, जो धन, ऐश्वर्य और समृद्धि प्रदान करता है।
- गं – गणेश बीज मंत्र, जो सभी बाधाओं को दूर करता है।
- सौभाग्य गणपतये – सौभाग्य और शुभता देने वाले भगवान गणपति को नमन।
- वर्वर्द – सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाले।
- सर्वजन्म में वषमान्य नमः – सभी जन्मों में पूजनीय और कृपा प्रदान करने वाले भगवान को प्रणाम।
इस मंत्र के जप का लाभ
- जीवन की सभी बाधाएँ दूर होती हैं।
- आर्थिक और आध्यात्मिक समृद्धि प्राप्त होती है।
- सौभाग्य, सफलता और शुभता बढ़ती है।
- यह विवाह, व्यापार और करियर में उन्नति के लिए विशेष रूप से लाभकारी है।
यदि आप प्रतिदिन इस मंत्र का 108 बार जप करते हैं, तो आपको भगवान गणेश की अपार कृपा प्राप्त होगी।