ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद स्री ह्रीं श्रीं ओं महालक्ष्म्यै नमः।
लक्ष्मी जी का मंत्र के जाप करने से भगवान लक्ष्मी की कृपा और धन की प्राप्ति होती है। यह मंत्र लक्ष्मी माता को प्रसन्न करने का उपाय माना जाता है और वित्तीय समृद्धि की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
यह मंत्र देवी महालक्ष्मी को समर्पित है, जो धन, ऐश्वर्य, समृद्धि, और वैभव की अधिष्ठात्री देवी हैं। इस मंत्र का जाप विशेष रूप से लक्ष्मी कृपा पाने, आर्थिक समृद्धि, और सौभाग्य के लिए किया जाता है।
मंत्र का अर्थ
ॐ — ब्रह्मांड की आदिशक्ति, पवित्र ध्वनि जो ब्रह्मांड की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है। श्रीं — यह बीज मंत्र है जो देवी लक्ष्मी की कृपा और समृद्धि को आकर्षित करता है। ह्रीं — यह बीज मंत्र देवी के आंतरिक शक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है। कमले — कमल पर विराजमान देवी लक्ष्मी को संबोधित। कमलालये — जो कमल के निवास स्थान में विराजती हैं, अर्थात् कमल पर बैठी लक्ष्मी। प्रसीद प्रसीद — कृपया प्रसन्न होइए, कृपा कीजिए। महालक्ष्म्यै नमः — देवी महालक्ष्मी को प्रणाम और नमन।
मंत्र का महत्व
आर्थिक समृद्धि:इस मंत्र के जाप से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है, जिससे आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और धन की प्राप्ति होती है। यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। वैभव और ऐश्वर्य:देवी लक्ष्मी ऐश्वर्य, वैभव, और समृद्धि की देवी मानी जाती हैं। इस मंत्र का नियमित जाप जीवन में भौतिक सुख-सुविधाओं और समृद्धि की प्राप्ति कराता है। सौभाग्य और शुभता:यह मंत्र जीवन में सौभाग्य, खुशहाली, और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह घर और कार्यस्थल में शुभता और शांति लाने में सहायक होता है। आध्यात्मिक उन्नति:बीज मंत्र "ह्रीं" देवी लक्ष्मी की आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है। इसका जाप मन को शुद्ध और स्थिर करता है और व्यक्ति को आंतरिक शांति और संतोष प्रदान करता है। कष्टों का निवारण:इस मंत्र का जाप करते हुए देवी लक्ष्मी से प्रार्थना की जाती है कि वे कष्टों और बाधाओं को दूर करें। यह संकटों और समस्याओं से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है।
जाप विधि
शुद्धिकरण:स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और एक शांत स्थान पर बैठें। ध्यान:मन को एकाग्र करें और देवी लक्ष्मी का ध्यान करें, जो कमल पर विराजमान हैं और उनके चारों ओर समृद्धि और सौभाग्य की आभा है। मंत्र का जाप:इस मंत्र का 108 बार जाप करें, इसे माला के माध्यम से करना और भी प्रभावी होता है। जाप के दौरान श्रद्धा और समर्पण के साथ देवी लक्ष्मी की कृपा और आशीर्वाद की कामना करें। आरती और प्रसाद:अंत में देवी लक्ष्मी की आरती करें और उन्हें पुष्प, फल या मिष्ठान्न अर्पित करें। इस मंत्र का नियमित जाप देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने और जीवन में समृद्धि, सौभाग्य, और शांति लाने का शक्तिशाली साधन है।