महालक्ष्मी व्रत भगवान विष्णु की पत्नी माता लक्ष्मी को समर्पित है। यह व्रत भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से प्रारंभ होकर 16 दिनों तक चलता है और इसे भाद्रपद पूर्णिमा पर संपन्न किया जाता है। यह व्रत धन, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए किया जाता है। इस व्रत को विधिपूर्वक करने से माता लक्ष्मी की कृपा से धन-धान्य और वैभव की प्राप्ति होती है।
महालक्ष्मी व्रत कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय की बात है, राजा धनाधिपति ने महालक्ष्मी की आराधना करते हुए यह व्रत किया। राजा की प्रजा अत्यंत समृद्ध और सुखी थी, लेकिन अचानक राज्य में सूखा पड़ गया और निर्धनता फैल गई। राजा ने सभी देवी-देवताओं की पूजा की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। राजा ने तब एक ऋषि से मार्गदर्शन लिया। ऋषि ने कहा, "हे राजन! आप महालक्ष्मी व्रत का पालन करें। माता लक्ष्मी धन और समृद्धि की देवी हैं। उनकी कृपा से आपके राज्य की सभी समस्याएं दूर होंगी।" राजा ने विधिपूर्वक 16 दिनों तक महालक्ष्मी व्रत किया। व्रत के प्रभाव से माता लक्ष्मी प्रसन्न हुईं और उन्होंने दर्शन देकर राजा को आशीर्वाद दिया। माता लक्ष्मी ने कहा, "हे राजन! आपकी प्रजा सुखी और समृद्ध होगी। आपके राज्य में धन, अन्न और वैभव का भंडार रहेगा।" माता लक्ष्मी के आशीर्वाद से राजा का राज्य फिर से समृद्ध हो गया। तभी से यह व्रत सुख-समृद्धि और वैभव के लिए किया जाने लगा।महालक्ष्मी व्रत की विधि
स्नान और शुद्धि
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।व्रत का संकल्प
माता लक्ष्मी के समक्ष व्रत का संकल्प लें।पूजन की तैयारी
लक्ष्मी जी की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें।पूजन सामग्री
चावल, रोली, सिंदूर, कलश, नारियल, फूल, मिठाई, फल, दीपक, और लाल वस्त्र।पूजन विधि
- माता लक्ष्मी की प्रतिमा पर चंदन, रोली, और सिंदूर अर्पित करें।
- जल और पंचामृत से अभिषेक करें।
- उन्हें सुहाग सामग्री (चूड़ी, बिंदी, आदि) अर्पित करें।
- लाल वस्त्र और गहने चढ़ाएं।
कथा श्रवण
महालक्ष्मी व्रत कथा को श्रद्धा से सुनें या पढ़ें।आरती और प्रसाद
माता लक्ष्मी की आरती करें और प्रसाद बांटें।व्रत का पालन
16 दिनों तक नियमपूर्वक व्रत रखें।व्रत का समापन
16वें दिन पूर्णिमा को ब्राह्मणों को भोजन और दान देकर व्रत का पारण करें।
व्रत का महत्व
- महालक्ष्मी व्रत से परिवार में सुख-शांति और धन-वैभव की प्राप्ति होती है।
- यह व्रत घर में आने वाले आर्थिक संकटों को दूर करता है।
- माता लक्ष्मी की कृपा से भक्त को अन्न, धन और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
- यह व्रत दांपत्य जीवन को सुखमय बनाता है और कर्ज़ व परेशानियों से मुक्ति दिलाता है।