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विजया पार्वती व्रत कथा

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विजया पार्वती व्रत कथा
विजया पार्वती व्रत देवी पार्वती और भगवान शिव को समर्पित है। यह व्रत विशेष रूप से श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। इस व्रत का पालन करने से व्यक्ति को सुख, सौभाग्य, और पारिवारिक समृद्धि प्राप्त होती है। विशेष रूप से यह व्रत विवाहित स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु और वैवाहिक सुख के लिए करती हैं।

विजया पार्वती व्रत कथा

एक समय की बात है। भगवान शिव और माता पार्वती कैलाश पर्वत पर विराजमान थे। माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा—

माता पार्वती बोलीं:
“हे महादेव! संसार में स्त्रियाँ अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और परिवार की मंगल-कामना के लिए अनेक व्रत करती हैं। ऐसा कौन-सा व्रत है, जिसे करने से स्त्री को सौभाग्य, संतान सुख और परिवार में सुख-शांति प्राप्त हो तथा उसके जीवन के विघ्न दूर हों?”

तब भगवान शिव ने कहा—

भगवान शिव बोले:
“हे देवी! आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाला पवित्र व्रत विजया पार्वती व्रत कहलाता है। यह व्रत माता पार्वती को समर्पित है। श्रद्धापूर्वक इस व्रत को करने से स्त्री को अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु, संतान सुख तथा घर-परिवार में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।”

भगवान शिव ने माता पार्वती को विजया पार्वती व्रत की कथा सुनाई।

विजया पार्वती व्रत कथा

प्राचीन समय में एक नगर में एक धर्मात्मा ब्राह्मण दंपति निवास करते थे। वे भगवान शिव और माता पार्वती के परम भक्त थे। उनके जीवन में किसी वस्तु की कमी नहीं थी। धन-धान्य, मान-सम्मान और सुख-सुविधाएँ सब कुछ था, लेकिन उनके कोई संतान नहीं थी।

ब्राह्मण दंपति संतान प्राप्ति की इच्छा से भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा करते थे। वे प्रतिदिन भगवान का स्मरण करते और मन में प्रार्थना करते कि उन्हें एक योग्य संतान की प्राप्ति हो।

एक दिन माता पार्वती ने भगवान शिव से उस दंपति की भक्ति और उनकी इच्छा के बारे में पूछा। भगवान शिव ने कहा कि उनकी भक्ति सच्ची है और उचित समय आने पर उनकी मनोकामना पूर्ण होगी।

कुछ समय बाद माता पार्वती की कृपा से ब्राह्मण दंपति के घर एक पुत्र का जन्म हुआ। पुत्र के जन्म से पूरा परिवार अत्यंत प्रसन्न हुआ। उन्होंने उसका पालन-पोषण प्रेम और संस्कारों के साथ किया।

बालक बड़ा होकर धर्म, वेद, शास्त्र और सदाचार का ज्ञान प्राप्त करने लगा। वह माता-पिता का आज्ञाकारी और भगवान का भक्त था।

एक बार उस बालक पर संकट आया। उसके माता-पिता बहुत चिंतित हो गए। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की तथा उनकी शरण में जाकर अपने पुत्र की रक्षा की प्रार्थना की।

माता पार्वती ने भक्त दंपति की श्रद्धा देखकर भगवान शिव से कहा—

“हे प्रभु! आपके भक्तों ने सदैव श्रद्धा और विश्वास के साथ आपकी पूजा की है। इनकी भक्ति को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए।”

भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से बालक संकट से मुक्त हो गया। परिवार ने इसे देवी-देवताओं की कृपा माना और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की।

तब भगवान शिव ने कहा—

“हे पार्वती! जो स्त्री श्रद्धा और नियमपूर्वक विजया पार्वती व्रत करती है तथा इस कथा का श्रवण या पाठ करती है, उसके जीवन के अनेक संकट दूर होते हैं। माता पार्वती की कृपा से उसे सौभाग्य, सुख, समृद्धि और परिवार का मंगल प्राप्त होता है।”

माता पार्वती ने कहा—

“जो स्त्री इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करेगी, उसके घर में सुख-शांति बनी रहेगी। उसके पति की आयु और स्वास्थ्य के लिए यह व्रत मंगलकारी होगा तथा संतान और परिवार के कल्याण की कामना पूर्ण होगी।”

जो भक्त श्रद्धापूर्वक विजया पार्वती व्रत करता है, माता पार्वती का पूजन करता है और कथा सुनता या पढ़ता है, उसके जीवन में माता की कृपा बनी रहती है।

बोलिए माता पार्वती की जय।
बोलिए भगवान शिव शंकर की जय।
हर हर महादेव।

विजया पार्वती व्रत कथा का फल

विजया पार्वती व्रत कथा के श्रवण और पाठ को धार्मिक परंपरा में पुण्यदायक माना गया है। श्रद्धालु इस व्रत के माध्यम से माता पार्वती से—

  • पति के दीर्घ और मंगलमय जीवन की कामना करते हैं।

  • अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करते हैं।

  • संतान सुख और संतान के कल्याण की कामना करते हैं।

  • परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

  • जीवन के संकट और बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।

  • माता पार्वती और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।

॥ इति विजया पार्वती व्रत कथा समाप्त ॥

व्रत की विधि

स्नान और शुद्धता

प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।

व्रत का संकल्प

देवी पार्वती और भगवान शिव की मूर्ति या चित्र के समक्ष व्रत का संकल्प लें।

पूजन सामग्री

फूल, चंदन, रोली, अक्षत, दूर्वा, बेलपत्र, दूध, दही, शहद, और मिठाई रखें।

पूजा विधान

भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति को गंगा जल से स्नान कराएं। चंदन, पुष्प, और बेलपत्र चढ़ाएं।

कथा श्रवण

विजया पार्वती व्रत कथा सुनें या पढ़ें।

आरती

शिव और पार्वती की आरती करें।

व्रत का पालन

दिनभर व्रत रखें और फलाहार करें।

व्रत का पारण

अगले दिन ब्राह्मण भोजन और दान देकर व्रत का समापन करें।

व्रत का महत्व

  1. इस व्रत को करने से विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य और उनके पति की दीर्घायु का वरदान मिलता है।
  2. यह व्रत सभी प्रकार के विघ्न, क्लेश, और परेशानियों को दूर करता है।
  3. इसे करने से परिवार में सुख, शांति, और समृद्धि बनी रहती है।
  4. भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से भक्त को जीवन में सफलता और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।
ॐ नमः शिवाय और ॐ पार्वत्यै नम: मंत्र का जाप इस व्रत को और भी फलदायी बनाता है।

हर हर महादेव!