30 Nov 2025 आध्यात्मिक मार्गदर्शन विश्वसनीय जानकारी

भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) – युद्ध और विजय के देवता

lord-kartikya

कार्तिकेय (जिन्हें स्कंद, मुरुगन, शरवन, और सुब्रह्मण्य के नाम से भी जाना जाता है) हिंदू धर्म में युद्ध और विजय के देवता हैं। उन्हें भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र के रूप में पूजा जाता है और वे भगवान गणेश के भाई हैं। कार्तिकेय विशेष रूप से दक्षिण भारत में बहुत पूजनीय हैं, जहां उन्हें मुरुगन के नाम से जाना जाता है।

कार्तिकेय का परिचय

कार्तिकेय का जन्म असुरों (राक्षसों) का संहार करने और देवताओं की रक्षा करने के लिए हुआ था। उनका वाहन मयूर (मोर) है और वे अपने हाथ में शक्ति (भाला) धारण करते हैं। उन्हें देवसेना का सेनापति (सेनानायक) माना जाता है, जो देवताओं की सेना का नेतृत्व करते हैं।

कार्तिकेय की कथा

कार्तिकेय के जन्म की कथा देवताओं और असुरों के बीच हुए संघर्ष से जुड़ी है। कथा के अनुसार, असुर तारकासुरने घोर तपस्या कर अमरता का वरदान प्राप्त किया और देवताओं को पराजित करने लगा। उसे केवल भगवान शिव के पुत्र द्वारा ही पराजित किया जा सकता था। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव और पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का जन्म हुआ, जिन्होंने तारकासुर का संहार किया और देवताओं को विजय दिलाई।

कार्तिकेय के प्रतीक और विशेषताएँ

शक्ति का प्रतीक: कार्तिकेय को युद्ध, वीरता, और शक्ति के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। वे राक्षसों के विनाशक हैं और उन्होंने देवताओं को असुरों से मुक्ति दिलाई।

छह मुख वाले देवता: कार्तिकेय के छह मुख होते हैं, जिन्हें "षणमुख" कहा जाता है। इन छह मुखों का प्रतीकात्मक अर्थ है कि वे संसार के छह मुख्य दिशाओं में देख सकते हैं और हर दिशा से आने वाले संकटों का सामना कर सकते हैं।

मोर वाहन: उनका वाहन मोर है, जो अहंकार और बुराई पर नियंत्रण का प्रतीक है। मोर को अहंकार और अभिमान का प्रतीक माना जाता है, और कार्तिकेय इसे नियंत्रित करते हैं, यह दर्शाता है कि वे अहंकार पर विजय प्राप्त कर चुके हैं।

शक्ति (भाला): कार्तिकेय का प्रमुख हथियार शक्ति या भाला है, जो उनकी अपार शक्ति और असुरों के संहार की क्षमता का प्रतीक है। इसे उन्होंने तारकासुर और अन्य राक्षसों के विनाश के लिए उपयोग किया था।

कार्तिकेय की पूजा और महत्व

दक्षिण भारत में विशेष पूजा: कार्तिकेय की विशेष पूजा दक्षिण भारत में की जाती है, विशेषकर तमिलनाडु में। यहाँ उन्हें "मुरुगन" के रूप में जाना जाता है और कई प्रमुख मंदिर उनके नाम पर समर्पित हैं, जैसे कि पलानी और तिरुचेंदूर

तमिल संस्कृति में विशेष महत्व: मुरुगन तमिलनाडु के लोगों के लिए खास महत्व रखते हैं। उनकी पूजा विभिन्न पर्वों में की जाती है, जैसे कि थाईपूसम और स्कंद षष्ठी

विवाह और संतान की प्राप्ति: हिंदू धर्म में कार्तिकेय की पूजा विशेष रूप से उन लोगों द्वारा की जाती है जो संतान की प्राप्ति की इच्छा रखते हैं या जिनके वैवाहिक जीवन में समस्याएँ होती हैं।

कार्तिकेय से जुड़ी प्रमुख कथाएँ

तारकासुर का वध: कार्तिकेय की सबसे प्रसिद्ध कथा तारकासुर के वध से जुड़ी है। तारकासुर एक अत्याचारी असुर था, जिसने देवताओं को परेशान कर रखा था। कार्तिकेय ने अपनी शक्ति से उसका वध किया और देवताओं को विजय दिलाई।

गणेश से प्रतियोगिता: एक अन्य कथा में, भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्रों गणेश और कार्तिकेय को पूरी दुनिया की परिक्रमा करने की चुनौती दी। जबकि कार्तिकेय ने अपनी सवारी मोर पर सवार होकर परिक्रमा की, गणेश ने अपने माता-पिता शिव और पार्वती की परिक्रमा की, यह मानते हुए कि वे ही उनका संपूर्ण ब्रह्मांड हैं। इससे गणेश विजेता बने, पर यह कथा कार्तिकेय की निर्भीकता और तत्परता को भी दर्शाती है।

कार्तिकेय शक्ति, वीरता, और विजय के प्रतीक हैं। उनका जीवन असुरों से देवताओं की रक्षा करने के लिए समर्पित था। वे हर संकट से जूझने और कर्तव्यपरायणता का आदर्श प्रस्तुत करते हैं। उनके भक्त विशेष रूप से उन्हें साहस, शक्ति, और सफलता की प्राप्ति के लिए पूजते हैं।

डिसक्लेमर: इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।