ॐ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥
मंत्र का अर्थ
नीलांजनसमाभासं – जो नीलमणि (ब्लू सफायर) की तरह चमकते हैं।
रविपुत्रं – जो सूर्य देव के पुत्र हैं।
यमाग्रजम् – जो यमराज (मृत्यु के देवता) के बड़े भाई हैं।
छायामार्तण्डसम्भूतं – जो छाया (संवर्णा) और सूर्य से उत्पन्न हुए हैं।
तं नमामि शनैश्चरम् – मैं शनैश्चर (शनि देव) को नमन करता हूँ।
इस मंत्र के लाभ
शनि ग्रह की अशुभ दृष्टि से बचाव।
आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति।
किसी भी प्रकार की शनि दशा में राहत।
शनि की साढ़े साती और ढैया के कष्टों से राहत।
नकारात्मक ऊर्जा और दुर्भाग्य दूर होता है।
आर्थिक समस्याओं और करियर में आ रही रुकावटें खत्म होती हैं।
न्याय और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए विशेष लाभकारी।