श्री यशोदा का परम दुलारा । बाबा की अखियन का तारा ।।
गोपिन के प्राणन का प्यारा । इन पर प्राण निछावर कीजे ।।
आरती बालकृष्ण की कीजे । बलदाऊ का छोटा भैया।
कान्हा कहि कहि बोलत मैया ।।
परम मुदित मन लेत वलैया । यह छबि नैनन में भरि लीजे ।।
आरती बालकृष्ण की कीजे । श्री राधावर सुघर कन्हैया।
ब्रज जन का नवनीत खवैया।।
देखत ही मन नयन चुरैया । अपना सरबस इनको दीजे।।
आरती बालकृष्ण की कीजे। तोतरि बोलनि मधुर सुहावे ।
सखन मधुर खेलत सुख पावे ।।
सोई सुकृति जो इनको ध्यावे। अब इनको अपनो करि लीजे।।
आरती बालकृष्ण की कीजे ।
श्री बालकृष्ण आरती – “आरती बालकृष्ण की कीजे”
“आरती बालकृष्ण की कीजे, अपना जनम सफल करि लीजे…” बालकृष्ण की यह आरती अत्यंत मधुर और भावपूर्ण है। यह आरती भगवान के बाल रूप की निर्मलता, प्रेम और आनंद को दर्शाती है।
आरती का भावार्थ
इस पंक्ति का अर्थ है:
जो भक्त बालकृष्ण की आरती करता है, उसका जीवन सफल और सार्थक हो जाता है।
बालकृष्ण का रूप हमें सिखाता है:
- निर्मल हृदय और निष्कपट प्रेम
- जीवन में आनंद और सरलता
- भगवान के प्रति सच्ची भक्ति
बालकृष्ण आरती का महत्व
- मन में भक्ति और आनंद का संचार होता है
- घर में सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली आती है
- बच्चों के लिए विशेष रूप से शुभ मानी जाती है
- गोकुल और वृंदावन में यह आरती अत्यधिक लोकप्रिय है
आरती करने की विधि
- बालकृष्ण की मूर्ति/लड्डू गोपाल को सजाएं
- माखन, मिश्री, दूध का भोग लगाएं
- दीपक और धूप जलाएं
- फूल और तुलसी अर्पित करें
- प्रेमपूर्वक आरती गाएं
- अंत में प्रसाद वितरित करें
आरती के लाभ
- मानसिक शांति और प्रसन्नता
- बच्चों के स्वास्थ्य और सुख की कामना
- घर में सुख-समृद्धि
- आध्यात्मिक उन्नति
शुभ समय
- सुबह (मंगल आरती)
- शाम (संध्या आरती)
विशेष दिन:
- जन्माष्टमी
- सोमवार और गुरुवार
- एकादशी