आगामी तिथियाँ
अमावस्या हिंदू पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है। इस दिन चंद्रमा पृथ्वी से दिखाई नहीं देता, इसलिए इसे नई चंद्र रात्रि (New Moon) भी कहा जाता है। प्रत्येक चंद्र मास में एक अमावस्या आती है और वर्ष में सामान्यतः 12 अमावस्याएँ होती हैं। अधिक मास होने पर इनकी संख्या 13 भी हो सकती है।
सनातन धर्म में अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन पितरों का तर्पण, दान, स्नान, जप, ध्यान और ईश्वर की आराधना करना शुभ माना जाता है।
अमावस्या को आत्मचिंतन, साधना और पितृ स्मरण का दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन किए गए दान, जप, तर्पण और पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है। विशेष रूप से सर्वपितृ अमावस्या, मौनी अमावस्या और दीपावली अमावस्या का महत्व अत्यधिक माना जाता है।
अमावस्या विशेष रूप से पितरों को समर्पित मानी जाती है। अनेक परिवार इस दिन जल, तिल और कुश से तर्पण करते हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार पितरों का स्मरण करने और योग्य विधि से तर्पण करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है तथा परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
✔ पवित्र नदी में स्नान करें।
✔ भगवान का ध्यान करें।
✔ दान-पुण्य करें।
✔ पितृ तर्पण करें।
✔ गरीबों को भोजन कराएं।
✔ पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं (यदि आपकी परंपरा में प्रचलित हो)।
✔ सात्विक भोजन करें।
✘ क्रोध और विवाद से बचें।
✘ नशे का सेवन न करें।
✘ किसी का अपमान न करें।
✘ असत्य और छल से दूर रहें।
✘ धार्मिक कार्यों में लापरवाही न करें।
जब अमावस्या सोमवार को पड़ती है, उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। यह शिव पूजा और पुण्य कर्मों के लिए विशेष मानी जाती है।
जब अमावस्या शनिवार को आती है, उसे शनि अमावस्या कहा जाता है। इस दिन अनेक श्रद्धालु भगवान शनिदेव की पूजा करते हैं।
आश्विन मास की अमावस्या को महालय या सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है और पितृ तर्पण के लिए विशेष महत्व रखता है।
कार्तिक मास की अमावस्या पर दीपावली का पर्व मनाया जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन मौन, स्नान, ध्यान और दान का विशेष महत्व बताया गया है।
अमावस्या हिंदू पंचांग की वह तिथि है जब चंद्रमा दिखाई नहीं देता और कृष्ण पक्ष समाप्त होता है।
सामान्यतः 12 अमावस्या होती हैं। अधिक मास होने पर 13 अमावस्या भी हो सकती हैं।
स्नान, दान, जप, ध्यान, पितृ तर्पण (परंपरा अनुसार) और ईश्वर की पूजा करना शुभ माना जाता है।
यह व्यक्ति की पारिवारिक परंपरा और धार्मिक मान्यताओं पर निर्भर करता है। जो लोग तर्पण करते हैं, वे सामान्यतः योग्य विधि और परंपरा के अनुसार इसे करते हैं।
हाँ, अनेक धार्मिक परंपराओं में अमावस्या के दिन दान-पुण्य को शुभ माना गया है।
जब अमावस्या सोमवार को पड़ती है, उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है।
जब अमावस्या शनिवार को आती है, उसे शनि अमावस्या कहा जाता है।
इस पेज के शीर्ष पर दी गई लाइव जानकारी में अगली अमावस्या की तिथि, प्रारंभ समय, समाप्ति समय और विशेष जानकारी प्रतिदिन अपडेट की जाती है।