आगामी तिथियाँ
पंचक हिंदू ज्योतिष में एक विशेष अशुभ काल है जो तब आता है जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में भ्रमण करता है — अर्थात् जब चंद्रमा धनिष्ठा (अंतिम दो चरण), शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में होता है। इन पाँच नक्षत्रों के कारण इसे "पंचक" कहा जाता है।
पंचक काल लगभग 5 दिनों का होता है और प्रत्येक माह में एक बार आता है। इस अवधि में कुछ विशेष कार्य करना अशुभ माना जाता है।
पंचक काल में सभी कार्य वर्जित नहीं होते। सामान्य दैनिक कार्य, पूजा-पाठ, व्यापार, विवाह (यदि मुहूर्त शुभ हो) आदि किए जा सकते हैं। केवल उपरोक्त विशेष कार्यों से बचना चाहिए।
यदि पंचक काल में अनिवार्य रूप से कोई कार्य करना पड़े तो किसी विद्वान पंडित से पंचक शांति पूजा करवाई जा सकती है। भगवान विष्णु की पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ भी लाभकारी माना जाता है।
पंचक लगभग 5 दिनों का होता है, जब चंद्रमा पाँच विशेष नक्षत्रों से गुजरता है।
सामान्यतः पंचक में विवाह से बचने की सलाह दी जाती है, परंतु शुभ मुहूर्त और पंडित की सलाह से निर्णय लेना उचित है।
पंचक में मृत्यु होने पर विशेष शांति विधि की जाती है। स्थानीय पंडित से परामर्श लें।
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