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शुक्ल पक्ष प्रतिपदा
10 Oct 2026, 09:18 PM → 11 Oct 2026, 09:30 PM

1. प्रतिपदा क्या है?

प्रतिपदा हिंदू पंचांग की प्रथम तिथि होती है। यह प्रत्येक पक्ष की शुरुआत का प्रतीक है। अमावस्या के बाद आने वाली प्रतिपदा को शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तथा पूर्णिमा के बाद आने वाली प्रतिपदा को कृष्ण पक्ष प्रतिपदा कहा जाता है। प्रत्येक चंद्र मास में दो प्रतिपदा तिथियाँ होती हैं।

प्रतिपदा को नए कार्यों की शुरुआत, पूजा-पाठ, दान, शुभ संकल्प और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए शुभ माना जाता है। अनेक महत्वपूर्ण पर्व और व्रत भी प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होते हैं।


2. प्रतिपदा का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में प्रतिपदा नई शुरुआत, शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है। विशेष रूप से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को हिंदू नववर्ष का प्रारंभ माना जाता है। इस दिन से विक्रम संवत का नया वर्ष आरंभ होता है तथा कई राज्यों में नववर्ष उत्सव मनाया जाता है।

प्रतिपदा तिथि पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान ब्रह्मा तथा कुलदेवता की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।


3. प्रतिपदा पर पूजा विधि

  • प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • घर के मंदिर की सफाई करें।
  • भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी या अपने इष्ट देव की पूजा करें।
  • दीपक एवं धूप जलाएं।
  • फूल, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
  • मंत्र जाप एवं ध्यान करें।
  • दान-पुण्य एवं जरूरतमंदों की सहायता करें।
  • नए कार्य शुभ मुहूर्त में प्रारंभ करें।

4. प्रतिपदा का महत्व

प्रतिपदा को नए कार्यों, व्यापार, गृह प्रवेश, धार्मिक अनुष्ठानों और शुभ संकल्पों के लिए शुभ तिथि माना जाता है। यह तिथि जीवन में नई ऊर्जा, नई शुरुआत और सकारात्मक परिवर्तन का संदेश देती है।


5. प्रतिपदा पर क्या करें?

✔ प्रातः स्नान एवं पूजा करें।

✔ भगवान का ध्यान करें।

✔ दान-पुण्य करें।

✔ परिवार के साथ धार्मिक कार्य करें।

✔ नए कार्य शुभ मुहूर्त में प्रारंभ करें।

✔ सात्विक भोजन करें।

✔ जरूरतमंद लोगों की सहायता करें।


6. प्रतिपदा पर क्या नहीं करें?

✘ क्रोध और विवाद से बचें।

✘ असत्य एवं छल का व्यवहार न करें।

✘ किसी का अपमान न करें।

✘ नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

✘ बिना शुभ विचार के नए कार्य प्रारंभ न करें।


7. प्रतिपदा से जुड़े प्रमुख पर्व

  • चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (हिंदू नववर्ष)
  • गुड़ी पड़वा
  • उगादि
  • गोवर्धन पूजा (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा)
  • बली प्रतिपदा
  • दीपावली के अगले दिन का उत्सव

8. शुक्ल एवं कृष्ण प्रतिपदा

🌕 शुक्ल पक्ष प्रतिपदा

अमावस्या के अगले दिन आने वाली प्रतिपदा को शुक्ल पक्ष प्रतिपदा कहा जाता है। इस दिन से चंद्रमा का आकार बढ़ना प्रारंभ होता है और इसे शुभ कार्यों के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।

🌑 कृष्ण पक्ष प्रतिपदा

पूर्णिमा के अगले दिन आने वाली प्रतिपदा कृष्ण पक्ष की शुरुआत करती है। इस दिन से चंद्रमा का आकार घटने लगता है।


9. प्रतिपदा के लाभ

  • नए कार्यों में सफलता
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार
  • आध्यात्मिक उन्नति
  • मानसिक शांति
  • धार्मिक पुण्य की प्राप्ति
  • परिवार में सुख एवं समृद्धि

Frequently Asked Questions (FAQ)

❓प्रतिपदा क्या होती है?

प्रतिपदा हिंदू पंचांग की पहली तिथि होती है जो प्रत्येक पक्ष की शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है।

❓एक महीने में कितनी प्रतिपदा होती हैं?

प्रत्येक चंद्र मास में दो प्रतिपदा तिथियाँ होती हैं—एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में।

❓प्रतिपदा का धार्मिक महत्व क्या है?

प्रतिपदा नई शुरुआत, शुभ कार्यों, पूजा-पाठ, दान और आध्यात्मिक उन्नति के लिए महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है।

❓क्या प्रतिपदा पर नए कार्य शुरू किए जा सकते हैं?

हाँ, शुभ मुहूर्त और स्थानीय परंपराओं के अनुसार प्रतिपदा को नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है।

❓शुक्ल प्रतिपदा और कृष्ण प्रतिपदा में क्या अंतर है?

अमावस्या के बाद आने वाली प्रतिपदा शुक्ल पक्ष प्रतिपदा होती है, जबकि पूर्णिमा के बाद आने वाली प्रतिपदा कृष्ण पक्ष प्रतिपदा कहलाती है।

❓क्या प्रतिपदा पर दान करना शुभ होता है?

हाँ, प्रतिपदा तिथि पर दान-पुण्य और धार्मिक कार्य करना शुभ माना जाता है।

❓प्रतिपदा पर कौन-कौन से पर्व मनाए जाते हैं?

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर हिंदू नववर्ष, गुड़ी पड़वा और उगादि मनाए जाते हैं। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर गोवर्धन पूजा और बली प्रतिपदा का पर्व मनाया जाता है।

❓अगली प्रतिपदा की तिथि कहाँ देखें?

इस पेज के शीर्ष पर दी गई लाइव जानकारी में अगली प्रतिपदा की तिथि, प्रारंभ समय, समाप्ति समय और अन्य पंचांग विवरण प्रतिदिन अपडेट किए जाते हैं।