पंचांग राशिफल भक्ति का मार्ग त्योहार
आरती

संतोषी माँ आरती | जय सन्तोषी माता,मैया जय सन्तोषी माता।

4 मिनट पढ़ें

जय सन्तोषी माता,मैया जय सन्तोषी माता।
अपने सेवक जन को,सुख सम्पत्ति दाता॥

जय सन्तोषी माता॥

सुन्दर चीर सुनहरीमाँ धारण कीन्हों।
हीरा पन्ना दमके,तन श्रृंगार कीन्हों॥

जय सन्तोषी माता॥

गेरू लाल छटा छवि,बदन कमल सोहे।
मन्द हंसत करुणामयी,त्रिभुवन मन मोहे॥

जय सन्तोषी माता॥

स्वर्ण सिंहासन बैठी,चंवर ढुरें प्यारे।
धूप दीप मधुमेवा,भोग धरें न्यारे॥

जय सन्तोषी माता॥

गुड़ अरु चना परमप्रिय,तामे संतोष कियो।
सन्तोषी कहलाई,भक्तन वैभव दियो॥

जय सन्तोषी माता॥

शुक्रवार प्रिय मानत,आज दिवस सोही।
भक्त मण्डली छाई,कथा सुनत मोही॥

जय सन्तोषी माता॥

मन्दिर जगमग ज्योति,मंगल ध्वनि छाई।
विनय करें हम बालक,चरनन सिर नाई॥

जय सन्तोषी माता॥

भक्ति भावमय पूजा,अंगीकृत कीजै।
जो मन बसै हमारे,इच्छा फल दीजै॥

जय सन्तोषी माता॥

दुखी दरिद्री, रोग,संकट मुक्त किये।
बहु धन-धान्य भरे घर,सुख सौभाग्य दिये॥

जय सन्तोषी माता॥

ध्यान धर्यो जिस जन ने,मनवांछित फल पायो।
पूजा कथा श्रवण कर,घर आनन्द आयो॥

जय सन्तोषी माता॥

शरण गहे की लज्जा,राखियो जगदम्बे।
संकट तू ही निवारे,दयामयी अम्बे॥

जय सन्तोषी माता॥

सन्तोषी माता की आरती,जो कोई जन गावे।
ऋद्धि-सिद्धि, सुख-सम्पत्ति,जी भरकर पावे॥

जय सन्तोषी माता॥

संतोषी माँ आरती का महत्व, विधि, लाभ और शुभ समय

परिचय

संतोषी माँ को संतोष, सुख और समृद्धि की देवी माना जाता है। “संतोष” यानी संतुष्टि—जो व्यक्ति जीवन में संतोष रखता है, उसके जीवन में शांति और खुशहाली बनी रहती है।

संतोषी माँ की आरती श्रद्धा से करने पर कष्ट दूर होते हैं, इच्छाएं पूर्ण होती हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है

संतोषी माँ आरती का महत्व

  • मन में संतोष और शांति का भाव उत्पन्न होता है
  • परिवार में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है
  • दुख, कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं
  • जीवन में सुख-समृद्धि आती है
  • मनोकामनाओं की पूर्ति होती है

मान्यता है कि सच्चे मन से आरती करने पर संतोषी माँ शीघ्र प्रसन्न होती हैं

संतोषी माँ की आरती करने की विधि

1. स्थान का चयन

पूजा के लिए स्वच्छ और शांत स्थान चुनें। वहां संतोषी माँ की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।

2. स्नान और वस्त्र

स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। सफेद या लाल रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।

3. पूजा सामग्री

  • गुड़ और चना (विशेष प्रसाद)
  • दीपक और धूप
  • पुष्प और कुमकुम
  • जल और नैवेद्य

ध्यान रखें: संतोषी माँ की पूजा में खट्टा (खटाई) वर्जित होता है।

4. ध्यान और मंत्र

माता का ध्यान करें और
 “जय संतोषी माता” या “ॐ संतोष्यै नमः” मंत्र का जाप करें।

5. आरती का आरंभ

  • दीपक जलाएं
  • माता को पुष्प और प्रसाद अर्पित करें
  • श्रद्धा और भक्ति से आरती गाएं

6. प्रसाद वितरण

पूजा के बाद गुड़-चना का प्रसाद बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें।

संतोषी माँ आरती के लाभ

  • जीवन की परेशानियां और कष्ट दूर होते हैं
  • मन में संतोष और शांति आती है
  • परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है
  • रिश्तों में प्रेम और मधुरता बढ़ती है
  • आर्थिक स्थिति में सुधार होता है

नियमित आरती से जीवन में स्थिरता और संतुलन आता है।

संतोषी माँ की आरती का शुभ समय

  • शुक्रवार – सबसे शुभ दिन
  • सुबह और शाम – दोनों समय आरती कर सकते हैं

विशेष रूप से:

  • 16 शुक्रवार व्रत के दौरान
  • किसी मनोकामना की पूर्ति के लिए

इस दिन खट्टा भोजन न करें।

विशेष उपाय

  • लगातार 16 शुक्रवार व्रत रखें
  • गुड़ और चने का भोग लगाएं
  • खट्टा भोजन (नींबू, इमली) से बचें

इससे माता संतोषी की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. संतोषी माँ की आरती कब करनी चाहिए?

शुक्रवार को, विशेष रूप से व्रत के दौरान।

2. पूजा में खट्टा क्यों नहीं खाते?

 यह संतोषी माँ की पूजा का मुख्य नियम माना जाता है।

3. क्या रोज आरती कर सकते हैं?

हां, रोज करने से मानसिक शांति मिलती है।

संतोषी माँ की आरती केवल पूजा नहीं, बल्कि जीवन में संतोष, शांति और सुख लाने का सरल उपाय है।
यदि इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाए, तो माता संतोषी अपने भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण करती हैं।

जय संतोषी माता!