पंचांग राशिफल अंक राशिफल भक्ति का मार्ग त्योहार लव कैलकुलेटर
त्योहार

आश्विन पूर्णिमा: शरद पूर्णिमा, पूजा विधि, व्रत, महत्व और कथा

9 मिनट पढ़ें
आश्विन पूर्णिमा: शरद पूर्णिमा, पूजा विधि, व्रत, महत्व और कथा

आश्विन पूर्णिमा हिंदू धर्म की अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पूर्णिमा तिथियों में से एक है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को आश्विन पूर्णिमा कहा जाता है। इसे विशेष रूप से शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। कई क्षेत्रों में यह कोजागरी पूर्णिमा, कौमुदी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से भी प्रसिद्ध है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात्रि चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ विशेष रूप से प्रकाशित होता है। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा करने तथा रात्रि में जागरण करने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है।

आश्विन पूर्णिमा क्या है?

हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा कहा जाता है। यही तिथि आश्विन पूर्णिमा कहलाती है।

आश्विन पूर्णिमा को शरद ऋतु के आगमन से भी जोड़ा जाता है। वर्षा ऋतु के बाद आकाश साफ होने लगता है और पूर्णिमा की चांदनी विशेष रूप से मनमोहक दिखाई देती है।

इसी कारण इस पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है।

आश्विन पूर्णिमा के प्रमुख नाम

भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में आश्विन पूर्णिमा के अलग-अलग नाम प्रचलित हैं:

  • शरद पूर्णिमा

  • कोजागरी पूर्णिमा

  • कोजागरी लक्ष्मी पूजा

  • कौमुदी पूर्णिमा

  • रास पूर्णिमा

  • कुमार पूर्णिमा

हालांकि क्षेत्र और परंपरा के अनुसार इस दिन मनाए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठानों में अंतर हो सकता है।

आश्विन पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

आश्विन पूर्णिमा को भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की उपासना से जोड़ा जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन:

  • माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

  • भगवान विष्णु का स्मरण किया जाता है।

  • चंद्र देव को अर्घ्य दिया जाता है।

  • रात्रि में जागरण किया जाता है।

  • खीर बनाकर भगवान को भोग लगाया जाता है।

  • दान-पुण्य किया जाता है।

  • भजन, कीर्तन और धार्मिक पाठ किए जाते हैं।

विशेष रूप से कोजागरी पूर्णिमा पर माता लक्ष्मी के जागरण और पूजा की परंपरा प्रचलित है।

शरद पूर्णिमा और माता लक्ष्मी

आश्विन पूर्णिमा को कई क्षेत्रों में माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है।

'कोजागरी' शब्द को सामान्यतः "कौन जाग रहा है?" से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस रात्रि में माता लक्ष्मी के जागरण और उनकी कृपा की कामना की जाती है।

भक्त रात्रि में जागकर:

  • माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं।

  • दीपक जलाते हैं।

  • लक्ष्मी मंत्र का जाप करते हैं।

  • भजन-कीर्तन करते हैं।

  • प्रसाद अर्पित करते हैं।

शरद पूर्णिमा और चंद्रमा

शरद पूर्णिमा की रात्रि चंद्रमा की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है।

भक्त चंद्रमा को अर्घ्य देकर सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए स्वच्छ जल में अक्षत या पुष्प मिलाकर चंद्र दर्शन के बाद अर्पित किया जा सकता है।

चंद्र देव का एक प्रचलित मंत्र है:

ॐ सोमाय नमः॥

इसका श्रद्धापूर्वक जाप किया जा सकता है।

शरद पूर्णिमा की खीर

शरद पूर्णिमा की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक परंपराओं में से एक खीर का भोग है।

कई परिवारों में दूध और चावल से खीर बनाकर भगवान को अर्पित की जाती है और फिर उसे चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा की चांदनी में रखी खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

यह ध्यान रखना चाहिए कि चांदनी में रखी खाद्य सामग्री को हमेशा स्वच्छ और सुरक्षित तरीके से ढककर रखना चाहिए।

आश्विन पूर्णिमा पूजा विधि

आश्विन पूर्णिमा पर पूजा अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार की जा सकती है।

1. प्रातः स्नान करें

सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान का स्मरण करें।

2. पूजा स्थान तैयार करें

पूजा स्थान की सफाई करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

3. दीपक जलाएं

घी या तेल का दीपक जलाकर धूप और दीप से भगवान की पूजा करें।

4. माता लक्ष्मी की पूजा करें

माता लक्ष्मी को कमल या अन्य सुगंधित फूल अर्पित करें। फल, मिठाई और नैवेद्य अर्पित किया जा सकता है।

5. भगवान विष्णु का पूजन करें

भगवान विष्णु को तुलसी दल और पीले फूल अर्पित करके उनकी आराधना करें।

6. मंत्र जाप करें

भगवान विष्णु का मंत्र:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

माता लक्ष्मी का प्रचलित मंत्र:

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥

का श्रद्धापूर्वक जाप किया जा सकता है।

7. चंद्रमा को अर्घ्य दें

रात्रि में चंद्रमा के दर्शन करने के बाद जल अर्पित करें और चंद्र देव का स्मरण करें।

8. खीर का भोग लगाएं

दूध और चावल से बनी खीर भगवान को अर्पित करें। परिवार की परंपरा हो तो उसे रात्रि में चंद्रमा की रोशनी में रखकर बाद में प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

आश्विन पूर्णिमा का व्रत

कई श्रद्धालु आश्विन पूर्णिमा के दिन व्रत रखते हैं। व्रत की विधि अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में अलग हो सकती है।

कुछ लोग पूरे दिन उपवास रखते हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु फलाहार करते हैं।

व्रत के दौरान:

  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का स्मरण करें।

  • सात्त्विक आहार लें।

  • धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।

  • भजन-कीर्तन करें।

  • जरूरतमंदों को दान दें।

यदि किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो तो उपवास रखने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार पूजा और धार्मिक साधना करना उचित है।

आश्विन पूर्णिमा पर दान का महत्व

हिंदू धार्मिक परंपरा में पूर्णिमा तिथि को दान-पुण्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

आश्विन पूर्णिमा पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार:

  • अन्न

  • वस्त्र

  • फल

  • भोजन

  • मिठाई

  • दक्षिणा

  • जरूरत की सामग्री

का दान किया जा सकता है।

दान का उद्देश्य जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना और सेवा की भावना को बढ़ाना माना जाता है।

आश्विन पूर्णिमा की रात्रि जागरण

कोजागरी पूर्णिमा पर रात्रि जागरण की विशेष परंपरा कई क्षेत्रों में है।

भक्त रात्रि में जागकर माता लक्ष्मी का स्मरण, भजन-कीर्तन और मंत्र जाप करते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस रात्रि माता लक्ष्मी की आराधना और जागरण करने से उनकी कृपा प्राप्त होने की कामना की जाती है।

आश्विन पूर्णिमा और भगवान श्रीकृष्ण

आश्विन पूर्णिमा को कुछ वैष्णव परंपराओं में रास पूर्णिमा के रूप में भी विशेष महत्व प्राप्त है।

भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों से संबंधित रासलीला का वर्णन वैष्णव भक्ति परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए इस दिन श्रीकृष्ण की भक्ति, भजन और कीर्तन भी किए जाते हैं।

आश्विन पूर्णिमा पर क्या करें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन निम्न कार्य किए जा सकते हैं:

  1. प्रातः स्नान करें।

  2. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।

  3. चंद्र देव को अर्घ्य दें।

  4. लक्ष्मी और विष्णु मंत्र का जाप करें।

  5. खीर का भोग लगाएं।

  6. रात्रि जागरण और भजन-कीर्तन करें।

  7. धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।

  8. जरूरतमंदों को दान दें।

  9. सात्त्विक भोजन और विचारों का पालन करें।

आश्विन पूर्णिमा पर क्या नहीं करना चाहिए?

धार्मिक दृष्टि से इस दिन संयम और सात्त्विकता का पालन करने की सलाह दी जाती है।

इसलिए:

  • किसी का अपमान या अनादर न करें।

  • अनावश्यक विवाद से बचें।

  • नशे और तामसिक गतिविधियों से दूर रहने का प्रयास करें।

  • पूजा में दिखावा न करें।

  • दान अपनी क्षमता के अनुसार ही करें।

  • धार्मिक मान्यताओं को लेकर दूसरों के साथ विवाद न करें।

आश्विन पूर्णिमा का आध्यात्मिक संदेश

आश्विन पूर्णिमा प्रकाश, भक्ति और सकारात्मकता का पर्व मानी जाती है। पूर्ण चंद्रमा की शीतल रोशनी मन को शांति और आध्यात्मिक चिंतन की ओर प्रेरित करती है।

माता लक्ष्मी की पूजा हमें समृद्धि के साथ-साथ संतोष और सदाचार का महत्व समझाती है, जबकि भगवान विष्णु की उपासना धर्म और मर्यादा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

FAQ: आश्विन पूर्णिमा

1. आश्विन पूर्णिमा को किस नाम से जाना जाता है?

आश्विन पूर्णिमा को मुख्य रूप से शरद पूर्णिमा कहा जाता है। कई क्षेत्रों में इसे कोजागरी पूर्णिमा, कौमुदी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा भी कहा जाता है।

2. आश्विन पूर्णिमा पर किसकी पूजा की जाती है?

इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा एवं आराधना की परंपरा है।

3. शरद पूर्णिमा पर खीर क्यों बनाई जाती है?

धार्मिक परंपरा में शरद पूर्णिमा की रात्रि खीर बनाकर भगवान को भोग लगाने और चांदनी में रखने की परंपरा है। बाद में इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

4. क्या आश्विन पूर्णिमा पर व्रत रखा जाता है?

हाँ, कई श्रद्धालु इस दिन व्रत या फलाहार करते हैं। व्रत की विधि क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

5. आश्विन पूर्णिमा पर कौन सा मंत्र पढ़ें?

भगवान विष्णु के लिए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥”, माता लक्ष्मी के लिए “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥” और चंद्र देव के लिए “ॐ सोमाय नमः॥” का जाप किया जा सकता है।

6. कोजागरी पूर्णिमा क्या है?

आश्विन पूर्णिमा को कई क्षेत्रों में कोजागरी पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा और रात्रि जागरण की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है।

7. क्या आश्विन पूर्णिमा को चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है?

हाँ, कई धार्मिक परंपराओं में शरद पूर्णिमा की रात्रि चंद्रमा को जल अर्पित करने और उनकी पूजा करने की परंपरा है।


आश्विन पूर्णिमा, जिसे शरद पूर्णिमा और कई क्षेत्रों में कोजागरी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है, हिंदू धर्म की महत्वपूर्ण पूर्णिमा तिथि है। इस दिन माता लक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा, व्रत, दान, मंत्र जाप, जागरण और खीर का भोग लगाने की परंपरा है।

शरद पूर्णिमा का पर्व भक्तों को प्रकाश, भक्ति, संयम, कृतज्ञता और सकारात्मकता का संदेश देता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इस पर्व की पूजा-विधि और मान्यताओं में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय परंपरा और पंचांग के अनुसार पूजा करना उचित माना जाता है।

आगामी पूर्णिमा व्रत की तिथियाँ

  • 25 अक्टूबर 2026, रविवार आश्विन पूर्णिमा व्रत
  • 24 नवंबर 2026, मंगलवार कार्तिक पूर्णिमा व्रत