02 Mar 2026 आध्यात्मिक मार्गदर्शन विश्वसनीय जानकारी

पंचांग :चतुष्पाद करण

चतुष्पाद करण हिंदू पंचांग में 11 करणों में से एक है। करण तिथि का आधा भाग होता है, और प्रत्येक तिथि में दो करण होते हैं। चतुष्पाद करण को पंचांग में एक विशेष स्थान प्राप्त है, लेकिन इसे शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।

चतुष्पाद करण की विशेषताएँ

प्रकृति
चतुष्पाद करण को अशुभ और हिंसक प्रवृत्ति का माना जाता है। यह विशेष रूप से अनिष्ट और संघर्षपूर्ण घटनाओं से जुड़ा होता है।
समय
चतुष्पाद करण अमावस्या या पूर्णिमा के दिन ही आता है। इसका समय पंचांग के अनुसार ज्ञात किया जा सकता है।
प्रभाव
इस करण के दौरान शुभ कार्य, जैसे विवाह, गृह प्रवेश, नए कार्य का आरंभ, यात्रा आदि, करने से बचना चाहिए। यह करण तंत्र, साधना, और गूढ़ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है।
चतुष्पाद करण के दौरान सावधानियाँ
शुभ कार्यों से बचें और इन्हें स्थगित करने का प्रयास करें। आध्यात्मिक और तांत्रिक साधनाओं में यह करण उपयोगी माना जाता है।इस समय किसी महत्वपूर्ण निर्णय या निवेश से बचें।
चतुष्पाद करण का महत्व
पंचांग में चतुष्पाद करण का उल्लेख दिन को मापने और विशिष्ट कार्यों की योजना बनाने में मदद करता है। इसे अशुभ करणों में गिना जाता है, इसलिए इसकी गणना और उपयोग विशेष सावधानी के साथ किया जाना चाहिए। यदि आपके कार्य की तिथि चतुष्पाद करण के अंतर्गत आती है, तो ज्योतिषीय परामर्श लेकर अन्य पंचांग घटकों का मूल्यांकन करना उचित रहेगा।
डिसक्लेमर: इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।