29 Jan 2026 Spiritual Guidance Trusted Information

संकष्टी गणेश चतुर्थी - भाद्रपद संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा

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भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित है और इसे करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाले सभी संकट दूर होते हैं। "संकष्टी" का अर्थ है संकट से मुक्ति, और इस दिन भगवान गणेश की उपासना करने से सभी प्रकार की परेशानियों का नाश होता है।

व्रत कथा

प्राचीन समय की बात है। एक बार देवता और ऋषि-मुनि भगवान गणेश के पास आए और प्रार्थना करने लगे। उन्होंने कहा, "हे भगवान गणेश! हमारे जीवन में अनेक प्रकार के संकट आते हैं। कृपया हमें ऐसा मार्ग बताइए जिससे हम संकटों से मुक्त हो सकें।" भगवान गणेश ने प्रसन्न होकर कहा, "जो भी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मेरा व्रत करेगा और रात्रि के समय चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करेगा, उसके जीवन के सभी संकट दूर हो जाएंगे। यह व्रत संकष्टी चतुर्थी के नाम से प्रसिद्ध होगा।" इसी समय, एक ब्राह्मण परिवार में एक बालक जन्मा। वह बालक बहुत ही धार्मिक और भक्ति में लीन रहता था। लेकिन एक दिन उसे कुष्ठ रोग हो गया, जिससे वह बहुत परेशान हो गया। उसके माता-पिता ने उसे संकष्टी चतुर्थी व्रत करने का सुझाव दिया। बालक ने श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत किया। व्रत के प्रभाव से भगवान गणेश ने उसे दर्शन दिए और उसका कुष्ठ रोग समाप्त हो गया। इसके बाद वह बालक स्वस्थ और सुखी जीवन जीने लगा।

व्रत की विधि

  1. प्रातःकाल स्नान: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. संकल्प: भगवान गणेश के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
  3. पूजा: भगवान गणेश की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं, दूर्वा, लड्डू, पुष्प, चंदन और मोदक अर्पित करें।
  4. मंत्र: "ॐ गण गणपतये नमः" का जाप करें।
  5. कथा श्रवण: गणेश चतुर्थी व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
  6. रात्रि पूजन: चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करें।
  7. व्रत पारण: अगले दिन सुबह ब्राह्मणों को भोजन कराकर व्रत का पारण करें।

व्रत का महत्व

संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत करने से भगवान गणेश की कृपा से सभी कष्ट, रोग और आर्थिक तंगी दूर होती है। व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है। भगवान गणेश सभी विघ्नों को हरने वाले हैं। इस व्रत को करने वाले भक्तों के जीवन में कभी भी संकट का वास नहीं होता।
"गणपति बप्पा मोरया!"
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