29 Jan 2026 Spiritual Guidance Trusted Information

देव दिवाली : महत्व, पूजा विधि और लाभ

dev-diwali
देव दिवाली का पर्व हिंदू धर्म में एक पवित्र और विशेष स्थान रखता है। यह दिवाली के 15 दिन बाद, कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन देवता स्वयं धरती पर आकर दिवाली का उत्सव मनाते हैं, इसलिए इसे "देव दिवाली" या "देव दीपावली" कहते हैं। विशेष रूप से वाराणसी में गंगा नदी के किनारे इस पर्व का भव्य आयोजन होता है।

देव दिवाली का महत्व

इस दिन का संबंध भगवान शिव और त्रिपुरासुर राक्षस का संहार करने की कथा से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने इसी दिन त्रिपुरासुर का वध किया था, जिससे देवताओं ने खुश होकर दिवाली जैसा उत्सव मनाया। इस दिन को देवताओं के उत्सव का दिन माना जाता है, और ऐसा माना जाता है कि देवता स्वयं धरती पर आकर इस महोत्सव का आनंद लेते हैं।

देव दिवाली की पूजा विधि

स्नान और व्रत का संकल्प: प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। गंगा स्नान: विशेष रूप से काशी में लोग गंगा स्नान करते हैं, जो अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है। दीपदान: शाम को घरों और मंदिरों के बाहर दीयों की पंक्ति सजाई जाती है, और विशेष रूप से गंगा किनारे हजारों दीपक जलाए जाते हैं। आरती और भजन-कीर्तन: भगवान शिव और अन्य देवताओं की आरती और भजन-कीर्तन किया जाता है। दान का महत्व: देव दिवाली पर दान का विशेष महत्व है। इस दिन अन्न, वस्त्र, और धन का दान करना शुभ माना जाता है।

देव दिवाली के लाभ

पुण्य की प्राप्ति: इस दिन की गई पूजा, व्रत और दान से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। भक्ति और शांति: देव दिवाली का उत्सव भक्तों में भक्ति और शांति का संचार करता है। मनोकामना पूर्ति: कहा जाता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई प्रार्थना से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आध्यात्मिक उन्नति: इस दिन का पर्व आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर प्रदान करता है। देव दिवाली का पर्व देवताओं और भक्तों के बीच एक पवित्र बंधन की तरह है, जो भक्ति, आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है।
Upcoming Dev Diwali dates
  • 24 November 2026, Tuesday
Disclaimer: The accuracy or reliability of any information/content/calculations contained in this article is not guaranteed. This information has been collected from various mediums/astrologers/almanac/sermons/beliefs/religious scriptures and presented to you. Our aim is only to provide information, its users should consider it as mere information. Additionally, the responsibility for any use remains that of the user himself.