29 Jan 2026 Spiritual Guidance Trusted Information

श्री झूलेलाल चालीसा

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॥ दोहा ॥

जय जय जल देवता, जय ज्योति स्वरूप । अमर उडेरो लाल जय, झुलेलाल अनूप ॥

॥ चौपाई ॥

रतनलाल रतनाणी नंदन । जयति देवकी सुत जग वंदन ॥ दरियाशाह वरुण अवतारी । जय जय लाल साईं सुखकारी ॥ जय जय होय धर्म की भीरा । जिन्दा पीर हरे जन पीरा ॥ संवत दस सौ सात मंझरा । चैत्र शुक्ल द्वितिया भगऊ वारा ॥4॥ ग्राम नसरपुर सिंध प्रदेशा । प्रभु अवतरे हरे जन कलेशा ॥ सिन्धु वीर ठट्ठा राजधानी । मिरखशाह नऊप अति अभिमानी ॥ कपटी कुटिल क्रूर कूविचारी । यवन मलिन मन अत्याचारी ॥ धर्मान्तरण करे सब केरा । दुखी हुए जन कष्ट घनेरा ॥8॥ पिटवाया हाकिम ढिंढोरा । हो इस्लाम धर्म चाहुँओरा ॥ सिन्धी प्रजा बहुत घबराई । इष्ट देव को टेर लगाई ॥ वरुण देव पूजे बहुंभाती । बिन जल अन्न गए दिन राती ॥ सिन्धी तीर सब दिन चालीसा । घर घर ध्यान लगाये ईशा ॥12॥ गरज उठा नद सिन्धु सहसा । चारो और उठा नव हरषा ॥ वरुणदेव ने सुनी पुकारा । प्रकटे वरुण मीन असवारा ॥ दिव्य पुरुष जल ब्रह्मा स्वरुपा । कर पुष्तक नवरूप अनूपा ॥ हर्षित हुए सकल नर नारी । वरुणदेव की महिमा न्यारी ॥16॥ जय जय कार उठी चाहुँओरा । गई रात आने को भौंरा ॥ मिरखशाह नऊप अत्याचारी । नष्ट करूँगा शक्ति सारी ॥ दूर अधर्म, हरण भू भारा । शीघ्र नसरपुर में अवतारा ॥ रतनराय रातनाणी आँगन । खेलूँगा, आऊँगा शिशु बन ॥20॥ रतनराय घर ख़ुशी आई । झुलेलाल अवतारे सब देय बधाई ॥ घर घर मंगल गीत सुहाए । झुलेलाल हरन दुःख आए ॥ मिरखशाह तक चर्चा आई । भेजा मंत्री क्रोध अधिकाई ॥ मंत्री ने जब बाल निहारा । धीरज गया हृदय का सारा ॥24॥ देखि मंत्री साईं की लीला । अधिक विचित्र विमोहन शीला ॥ बालक धीखा युवा सेनानी । देखा मंत्री बुद्धि चाकरानी ॥ योद्धा रूप दिखे भगवाना । मंत्री हुआ विगत अभिमाना ॥ झुलेलाल दिया आदेशा । जा तव नऊपति कहो संदेशा ॥28॥ मिरखशाह नऊप तजे गुमाना । हिन्दू मुस्लिम एक समाना ॥ बंद करो नित्य अत्याचारा । त्यागो धर्मान्तरण विचारा ॥ लेकिन मिरखशाह अभिमानी । वरुणदेव की बात न मानी ॥ एक दिवस हो अश्व सवारा । झुलेलाल गए दरबारा ॥32॥ मिरखशाह नऊप ने आज्ञा दी । झुलेलाल बनाओ बन्दी ॥ किया स्वरुप वरुण का धारण । चारो और हुआ जल प्लावन ॥ दरबारी डूबे उतराये । नऊप के होश ठिकाने आये ॥ नऊप तब पड़ा चरण में आई । जय जय धन्य जय साईं ॥36॥ वापिस लिया नऊपति आदेशा । दूर दूर सब जन क्लेशा ॥ संवत दस सौ बीस मंझारी । भाद्र शुक्ल चौदस शुभकारी ॥ भक्तो की हर आधी व्याधि । जल में ली जलदेव समाधि ॥ जो जन धरे आज भी ध्याना । उनका वरुण करे कल्याणा ॥40॥

॥ दोहा ॥

चालीसा चालीस दिन पाठ करे जो कोय । पावे मनवांछित फल अरु जीवन सुखमय होय ॥ ॥ ॐ श्री वरुणाय नमः ॥
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