29 Jan 2026 Spiritual Guidance Trusted Information

वैदिक ज्योतिष | नवग्रह और उनका जीवन पर प्रभाव

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ज्योतिष में नवग्रह (सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु) का व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव माना गया है। ये ग्रह न केवल भौतिक रूप से हमारे सौर मंडल के सदस्य हैं, बल्कि वैदिक ज्योतिष में इन्हें जीवन के विभिन्न पहलुओं (जैसे स्वास्थ्य, धन, शिक्षा, विवाह, संबंध, करियर) को नियंत्रित करने वाला माना जाता है। प्रत्येक ग्रह का एक विशेष स्वभाव, ऊर्जा और भूमिका होती है, और यह व्यक्ति की कुंडली में अपनी स्थिति, दृष्टि (Aspect), और चाल (Gochar) के आधार पर शुभ (सकारात्मक) या अशुभ (नकारात्मक) फल देता है।

  1. सूर्य (Surya): आत्मा और शक्ति का ग्रह
    • प्राकृतिक महत्व: सूर्य प्रकाश और ऊर्जा का स्रोत है।
    • ज्योतिषीय महत्व: सूर्य आत्मा, नेतृत्व, पिता, स्वास्थ्य और मान-सम्मान का कारक है।
    • शुभ प्रभाव: आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, ऊर्जा, और सफलता।
    • अशुभ प्रभाव: अहंकार, क्रोध, मानसिक तनाव, और हृदय संबंधी समस्याएँ।
    • उपाय:
      1. सूर्य को अर्घ्य देना।
      2. आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ।
      3. तांबे के बर्तन में जल पीना।

  2. चंद्रमा (Chandra): मन और भावनाओं का ग्रह
    • प्राकृतिक महत्व: चंद्रमा का संबंध जल और मन से है।
    • ज्योतिषीय महत्व: यह मन, माता, मानसिक शांति, कल्पना और भावनाओं का कारक है।
    • शुभ प्रभाव: शांति, संतुलन, रचनात्मकता, और सकारात्मक सोच।
    • अशुभ प्रभाव: मानसिक अशांति, अनिद्रा, माँ से दूरी, और अस्थिरता।
    • उपाय:
      1. सोमवार का व्रत रखें।
      2. चंद्रमा के बीज मंत्र का जाप।
      3. चाँदी का दान करें।

  3. मंगल (Mangal): ऊर्जा और साहस का ग्रह
    • प्राकृतिक महत्व: मंगल युद्ध, ऊर्जा और क्रिया का प्रतीक है।
    • ज्योतिषीय महत्व: यह साहस, भूमि, भाई-बहन, और ऊर्जा का कारक है।
    • शुभ प्रभाव: साहस, शक्ति, नेतृत्व क्षमता, और पराक्रम।
    • अशुभ प्रभाव: क्रोध, दुर्घटना, विवाद, और शारीरिक चोट।
    • उपाय:
      1. मंगल वार का व्रत रखें।
      2. हनुमान चालीसा का पाठ।
      3. मूंगा (लाल रत्न) धारण करें।

  4. बुध (Budh): बुद्धि और संवाद का ग्रह
    • प्राकृतिक महत्व: बुध का संबंध संवाद, तर्क, और व्यापार से है।
    • ज्योतिषीय महत्व: यह बुद्धि, संवाद, व्यापार, गणित, और लेखन का कारक है।
    • शुभ प्रभाव: अच्छी संचार क्षमता, तार्किक सोच, और व्यापार में सफलता।
    • अशुभ प्रभाव: भ्रम, झूठ, गलत निर्णय, और वाणी से जुड़ी समस्याएँ।
    • उपाय:
      1. बुध के मंत्र का जाप।
      2. तुलसी का पौधा लगाएँ।
      3. हरे वस्त्र दान करें।

  5. गुरु (Brihaspati): ज्ञान और धर्म का ग्रह
    • प्राकृतिक महत्व: गुरु सबसे बड़ा ग्रह है और ज्ञान, धर्म और शिक्षा का प्रतीक है।
    • ज्योतिषीय महत्व: यह ज्ञान, शिक्षक, धर्म, संतान, और धन का कारक है।
    • शुभ प्रभाव: धन, धार्मिकता, संतान सुख, और शिक्षण में सफलता।
    • अशुभ प्रभाव: शिक्षा में बाधा, धन हानि, और स्वास्थ्य समस्याएँ।
    • उपाय:
      1. बृहस्पतिवार का व्रत रखें।
      2. गुरु मंत्र का जाप।
      3. पीले वस्त्र और चने की दाल दान करें।

  6. शुक्र (Shukra): प्रेम और सुख का ग्रह
    • प्राकृतिक महत्व: शुक्र सौंदर्य, कला और भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक है।
    • ज्योतिषीय महत्व: यह प्रेम, विवाह, धन, और ऐश्वर्य का प्रतीक है।
    • शुभ प्रभाव: भौतिक सुख, समृद्धि, और विवाह में सफलता।
    • अशुभ प्रभाव: प्रेम में असफलता, धन हानि, और दाम्पत्य जीवन में समस्याएँ।
    • उपाय:
      1. शुक्रवार का व्रत रखें।
      2. शुक्र मंत्र का जाप।
      3. चावल, चीनी, और दूध का दान करें।

  7. शनि (Shani): कर्म और न्याय का ग्रह
    • प्राकृतिक महत्व: शनि का संबंध कर्म, समय, और न्याय से है।
    • ज्योतिषीय महत्व: यह मेहनत, धैर्य, कष्ट, और कर्म का कारक है।
    • शुभ प्रभाव: न्याय, परिश्रम का फल, और दीर्घायु।
    • अशुभ प्रभाव: देरी, बाधाएँ, मानसिक और शारीरिक कष्ट।
    • उपाय:
      1. शनिदेव की पूजा करें।
      2. शनिवार को तेल दान करें।
      3. शनि मंत्र का जाप।

  8. राहु: छाया ग्रह, भ्रम और महत्वाकांक्षा का प्रतीक
    • प्राकृतिक महत्व: राहु अप्रत्याशित घटनाओं और भ्रम का कारक है।
    • ज्योतिषीय महत्व: यह अचानक लाभ, राजनीति, और विदेश यात्रा का प्रतीक है।
    • शुभ प्रभाव: अप्रत्याशित लाभ, उच्च पद, और महत्वाकांक्षा।
    • अशुभ प्रभाव: भ्रम, मानसिक कष्ट, और नकारात्मक सोच।
    • उपाय:
      1. राहु के मंत्र का जाप।
      2. नारियल और उड़द दान करें।
      3. सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।

  9. केतु: छाया ग्रह, त्याग और आध्यात्म का प्रतीक
    • प्राकृतिक महत्व: केतु आध्यात्म, त्याग, और मोक्ष का कारक है।
    • ज्योतिषीय महत्व: यह ध्यान, साधना, और अप्रत्याशित लाभ का प्रतीक है।
    • शुभ प्रभाव: आध्यात्मिक उन्नति, गूढ़ विज्ञान में रुचि, और मोक्ष।
    • अशुभ प्रभाव: मानसिक बेचैनी, संदेह, और स्वास्थ्य समस्याएँ।
    • उपाय:
      1. केतु मंत्र का जाप।
      2. काले तिल और कंबल का दान।
      3. गरीबों को भोजन कराएँ।
नवग्रहों का व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव होता है। ये ग्रह जीवन में आने वाली सकारात्मक और नकारात्मक परिस्थितियों को नियंत्रित करते हैं। ग्रहों की स्थिति के अनुसार उपाय और शांति के माध्यम से उनके प्रभाव को संतुलित किया जा सकता है।
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