फागण का नज़ारा है , आयी है खाटु से चिट्ठियाँ, श्याम बाबा ने पुकारा है । हमने सुना है फागण में मेला लगता है भारी दूर दूर तक है चर्चा मेले की महिमा न्यारी जो एक बर जाता है , आता तो है लेकिन दिल हार के आता है । लाखों लाखों निशान लिए , चलते है सब मतवारे सारे रस्ते गूँजते है, श्याम नाम के जय कारे सुन सुन के उछलता है , प्रेमी से मिलने को ये खुद भी मचलता है । राज उसे जब प्रेमी की यादें बहुत सताती है मोड़ता है रुख़ बादल का और फागण रुत आती है फागण के बहाने से , मन को सुकून मिले खाटु में जाने से
फागण का नजारा है | खाटू श्याम भजन | राज पारीक
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