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महाराजा अग्रसेन जयंती : महत्व, इतिहास और तिथि

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महाराजा अग्रसेन जयंती : महत्व, इतिहास और तिथि
महाराजा अग्रसेन जयंती अग्रवाल समाज और वैश्य समुदाय का प्रमुख पर्व है। यह महान समाज सुधारक और दयालु शासक महाराजा अग्रसेन जी की जयंती के रूप में मनाया जाता है।
अग्रसेन जी ने अपने राज्य में समानता, अहिंसा, व्यापार और दान को जीवन का मूल मंत्र बनाया था।

महाराजा अग्रसेन का जीवन परिचय

महाराजा अग्रसेन प्राचीन भारत के एक महान समाज सुधारक और प्रजावत्सल शासक थे। उनका जन्म सूर्यवंशी क्षत्रिय कुल में हुआ था। उन्होंने अग्रेहा नगरी (वर्तमान हरियाणा का हिसार क्षेत्र) की स्थापना की। उनकी पत्नी महारानी मधवी नागवंश की राजकुमारी थीं। अग्रसेन जी ने अपने राज्य में युद्ध और हिंसा का त्याग कर व्यापार, शांति और सेवा को महत्व दिया। उन्होंने समाज को 18 गणों में विभाजित किया, जिससे आगे चलकर अग्रवाल समाज के 18 गोत्र बने। उनकी सबसे प्रसिद्ध नीति “एक ईंट और एक रुपया” थी। इस नीति के अनुसार जब कोई नया परिवार नगर में बसता, तो प्रत्येक परिवार उसे एक ईंट और एक रुपया देता। इससे उसके लिए घर और व्यवसाय दोनों की व्यवस्था हो जाती। वे भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के भक्त थे तथा अहिंसा और समानता के पक्षधर थे। उनके आदर्शों के कारण ही अग्रवाल समाज आज भी सहयोग, भाईचारे और परोपकार के लिए जाना जाता है। भारत सरकार ने उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया और दिल्ली में अग्रसेन की बावली जैसी धरोहर उनकी स्मृति को जीवित रखती है। महाराजा अग्रसेन एक आदर्श राजा ही नहीं, बल्कि मानवता और सेवा के प्रतीक माने जाते हैं।

महाराजा अग्रसेन जयंती का महत्व

  • अग्रवाल समाज के लिए यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है।
  • उनके सिद्धांत आज भी समाज में आदर्श माने जाते हैं।
  • अग्रसेन जी ने अहिंसा और न्याय को राज्य की नींव बनाया।
  • यह पर्व हमें सामाजिक सद्भाव और सहयोग का संदेश देता है।

कैसे मनाई जाती है अग्रसेन जयंती

  • इस दिन अग्रसेन जी की प्रतिमा और चित्र की पूजा की जाती है।
  • अग्रवाल समाज में शोभायात्रा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और भजन संध्या का आयोजन होता है।
  • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दान देना शुभ माना जाता है।

आगामी महाराजा अग्रसेन जयंती की तिथियाँ

  • 11 अक्टूबर 2026, रविवर