जरा इतना बता दे कान्हा, कि तेरा रंग काला क्यों । श्लोक- श्याम का काला बदन, और श्याम घटा से काला, शाम होते ही, गजब कर गया मुरली वाला ॥ जरा इतना बता दे कान्हा, कि तेरा रंग काला क्यों, तु काला होकर भी जग से, इतना निराला क्यों ॥ मैंने काली रात में जन्म लिया, और काली गाय का दूध पीया, कजरे का रंग भी काला, कमली का रंग भी काला, इसी लिए मै काला ॥ सखी रोज़ ही घर में बुलाती है, और माखन बहुत खिलाती है, सखिओं का दिल भी काला, इसी लिए मै काला ॥ मैंने काले नाग पर नाच किया, और काले नाग को नाथ लिया, नागों का रंग भी काला, यमुना का रंग भी काला, इसी लिए मै काला ॥ सावन में बिजली कड़कती है, बादल भी बहुत बरसतें है, बादल का रंग भी काला, बिजली का रंग भी काला, इसी लिए मै काला ॥ सखी नयनों में कजरा लगाती है, और नयनों में मुझे बिठाती है, कजरे का रंग भी काला, नयनों का रंग भी काला, इसी लिए मै काला ॥ जरा इतना बता दें कान्हा, कि तेरा रंग काला क्यों, तु काला होकर भी जग से, इतना निराला क्यों ॥
श्री कृष्ण भजन -जरा इतना बता दे कान्हा
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