म्हारां घट मा बिराजता , श्रीनाथजी , यमुनाजी , महाप्रभुजी म्हारु मनड़ो छे गोकुल वनरावन , म्हारां तन ना आँगणियां मा तुलसी ना वन, म्हारा प्राण जीवन, म्हारां घट मा बिराजता , श्रीनाथजी , यमुनाजी , महाप्रभुजी म्हारां आतम ना आंगणे, श्री बालकृष्णजी म्हारी आँखों विशे , गिरधारी रे धारी म्हारु तन मन गयु जेने , वारी रे वारी , म्हारां श्याम मुरारी म्हारां प्राण थकी , म्हाने वैष्णव व्हाला नित करता श्रीनाथजी ने , काला रे व्हाला म्हें तो वल्लभ प्रभुजी ना किन्हा छे दर्शन , म्हारो मोही लिन्हों मन हूँ तो नित्य विठ्ठल वर नी , सेवा रे करु हूँ तो आठ समा के री , झाँकी रे करु मैं तो चितडू श्रीनाथजी रा , चरण धरयू , जीवन सफल करयू म्हारां अंत समय की रे , सुनो रे अरजी, ले जो श्रीजी बाबा शरणां मां, दया रे करी म्हाने तेडावे यम के रा , कदी ना आवे , म्हारो नाथ तेडावे
म्हारां घट मा बिराजता श्री नाथजी
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