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पंचांग : परिघ योग

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परिघ योग एक अशुभ योग माना जाता है, जो वैदिक ज्योतिष में बाधाओं और रुकावटों का संकेत देता है। "परिघ" का अर्थ होता है रोकने वाला या अवरोध उत्पन्न करने वाला। इस योग में किए गए कार्यों में अड़चनें, देरी और असफलता की संभावना अधिक होती है, इसलिए इसे महत्वपूर्ण और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।

पंचांग में योग का महत्व

पंचांग का “योग” सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर बनने वाला एक महत्वपूर्ण तत्व है, जो दिन के शुभ-अशुभ प्रभाव को दर्शाता है। हालांकि “योग” का उल्लेख जन्म कुंडली में भी होता है, लेकिन वहां यह ग्रहों के विशेष संयोजन (जैसे राजयोग, धन योग) के रूप में जीवन के दीर्घकालिक परिणामों को बताता है। पंचांग के 27 योग दैनिक कार्यों की योजना बनाने में सहायक होते हैं, जबकि कुंडली के योग व्यक्ति के जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं।
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परिघ योग के प्रभाव और विशेषताएं

कार्य में रुकावट: इस योग में कार्यों के दौरान बार-बार बाधाएं और अड़चनें आ सकती हैं। 
मानसिक अस्थिरता: व्यक्ति को निर्णय लेने में कठिनाई और मन में असंतुलन महसूस हो सकता है।  शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं: विवाह, गृह-प्रवेश, नया व्यवसाय या महत्वपूर्ण निर्णय इस योग में टालना चाहिए। 
आत्मचिंतन का समय: यह योग व्यक्ति को रुककर सोचने, गलतियों को समझने और सुधार करने का अवसर देता है।

परिघ योग के दौरान क्या करें

धैर्य और संयम रखें: इस समय में शांत रहकर सोच-समझकर कार्य करना चाहिए। धार्मिक कार्य: पूजा, पाठ और ध्यान करने से मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मकता कम होती है। योजना बनाएं: नए कार्य की बजाय भविष्य की योजना बनाने और रणनीति तैयार करने पर ध्यान दें।

परिघ योग में क्या न करें

इस योग में नए कार्य की शुरुआत, बड़ा निवेश, यात्रा या कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचना चाहिए। जल्दबाजी और जोखिम से दूर रहें।

परिघ योग का महत्व

परिघ योग जीवन में आने वाली बाधाओं को समझने और उनसे सीखने का संकेत देता है। यह समय व्यक्ति को धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्लेषण सिखाता है। यदि इस योग का सही उपयोग किया जाए, तो यह भविष्य की सफलता के लिए मजबूत आधार तैयार कर सकता है।

परिघ योग के उपाय

इस योग के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए:
  • भगवान हनुमान जी की पूजा करें
  • “ॐ हनुमते नमः” मंत्र का जप करें
  • हनुमान चालीसा का पाठ करें
  • जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान करें

निष्कर्ष

परिघ योग एक बाधा उत्पन्न करने वाला समय है, जिसमें सावधानी और धैर्य की आवश्यकता होती है।
यदि इस समय का उपयोग आत्मचिंतन और योजना बनाने में किया जाए, तो भविष्य में बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परिघ योग क्या होता है?
यह एक अशुभ पंचांग योग है, जिसमें कार्यों में बाधाएं आने की संभावना अधिक होती है।
क्या परिघ योग में नया काम शुरू करना अच्छा है?
नहीं, इस योग में नए कार्य और महत्वपूर्ण निर्णय टालना बेहतर माना जाता है।
इस योग में कौन सा मंत्र जप करें?
“ॐ हनुमते नमः” मंत्र का जप लाभकारी होता है।