04 Mar 2026 आध्यात्मिक मार्गदर्शन विश्वसनीय जानकारी

पर्वत कि ऊँची चढ़ाई रे भोले तेरे दर्शन को आई रे लिरिक्स

पर्वत कि ऊँची चढ़ाई रे भोले तेरे दर्शन को आई रे मै तो जल भर कलशा लायी रे झाडो में उलझती आई रे सांप बिच्छु ने एसी डराई रे मेरी गगरी छलकती आयी रे पर्वत कि ऊँची चढ़ाई रे भोले तेरे दर्शन को आई रे मै तो चन्दन केसर लायी रे शमशानों को देख घबरायी रे भुत प्रेतों ने एसी डराई रे मेरी केसर बिखरती आई रे पर्वत कि ऊँची चढ़ाई रे भोले तेरे दर्शन को आई रे मै तो हार गूँथ कर लायी रे शिव जी के गले पहनाई रे भोले ने पलके उठाई रे शिव गौरा से दर्शन पाई रे पर्वत कि ऊँची चढ़ाई रे भोले तेरे दर्शन को आई रे मै तो भंगिया घोट कर लायी रे द्वार नंदी को बैठे पायी रे नंदी ने मोहे समझायी रे भोले समाधी लगायी रे पर्वत कि ऊँची चढ़ाई रे भोले तेरे दर्शन को आई रे
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