भाद्रपद मास की अमावस्या को पिठौरी अमावस्या कहा जाता है।
यह पर्व मातृ शक्ति और संतति सुख को समर्पित है।
इस दिन महिलाएँ व्रत रखकर अपने बच्चों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
पिठौरी अमावस्या को संतान सुख, परिवार की रक्षा और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
पिठौरी अमावस्या का महत्व
पिठौरी अमावस्या मुख्य रूप से माताओं द्वारा अपने बच्चों की सुख-समृद्धि और दीर्घायु के लिए मनाई जाती है। इस दिन माता दुर्गा और मातृ शक्तियों की विशेष पूजा की जाती है। परंपरा अनुसार इस दिन आटे या मिट्टी से पिठौरियाँ (छोटे-छोटे पुतले) बनाकर पूजा की जाती है। ऐसा करने से संतति सुख प्राप्त होता है और संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं।
पिठौरी अमावस्या की पूजा विधि
- सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
- आटे, मिट्टी या चावल के आटे से पिठौरियाँ (पुतले) बनाएं।
- माता दुर्गा और मातृ शक्तियों की पूजा करें।
- फल, पुष्प और मिठाई अर्पित करें।
- बच्चों को मिठाई और फल खिलाकर आशीर्वाद दें।
पिठौरी अमावस्या पर उपाय
- इस दिन गाय को आटा और गुड़ खिलाने से संतान सुख में वृद्धि होती है।
- गरीब बच्चों को भोजन और वस्त्र देने से परिवार में समृद्धि आती है।
- माता दुर्गा को लाल फूल और सिंदूर अर्पित करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति रहती है।