“सबसे पहले तुम्हें मनाऊँ, गौरी सुत गणराज, तुम हो देवों के सरताज” भगवान श्री गणेश को समर्पित एक सुंदर भक्तिमय भजन है। इस भजन में गणपति महाराज को प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता, गौरी पुत्र और देवों में श्रेष्ठ बताया गया है।
हिंदू धर्म की परंपरा में किसी भी शुभ कार्य, पूजा, अनुष्ठान या मांगलिक अवसर से पहले भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है। भक्त इस भजन के माध्यम से गणेश जी से अपने जीवन के सभी विघ्न दूर करने और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
सबसे पहले तुम्हें मनाऊँ — भजन का पूरा पाठ
सबसे पहले तुम्हे मनाऊँ,
गौरी सूत गणराज,
तुम हो देवों के सरताज।
दूंद दुँदाला सूँड़ सुन्डाला,
मस्तक मोटा कान,
तुम हो देवों के सरताज।।
गंगाजल स्नान कराऊँ,
केसर चंदन तिलक लगाऊं,
रंग बिरंगे फूल मैं लाऊँ,
सजा-सजा तुमको पहनाऊँ।
लम्बोदर गजवदन विनायक,
राखो मेरी लाज,
तुम हो देवों के सरताज।।
जो गणपति को प्रथम मनाता,
उसका सारा दुख मिट जाता,
रिद्धि सिद्धि सुख सम्पति पाता,
भव से बेड़ा पार हो जाता।
मेरी नैया पार करो,
मैं तेरा लगाऊँ ध्यान,
तुम हो देवों के सरताज।।
पार्वती के पुत्र हो प्यारे,
सारे जग के तुम रखवाले,
भोलेनाथ हैं पिता तुम्हारे,
सूर्य चन्द्रमा मस्तक धारें।
मेरे सारे दुख मिट जाएँ,
देवों यही वरदान,
तुम हो देवों के सरताज।।
सबसे पहले तुम्हे मनाऊँ,
गौरी सूत गणराज,
तुम हो देवों के सरताज।
दूंद दुँदाला सूँड़ सुन्डाला,
मस्तक मोटा कान,
तुम हो देवों के सरताज।।
नोट: भजन के अलग-अलग गायन/प्रकाशित संस्करणों में कुछ शब्दों की वर्तनी या पंक्तियों में छोटे अंतर मिल सकते हैं। ऊपर पाठ आपके द्वारा दिए गए भजन के आधार पर व्यवस्थित किया गया है।
भजन का सरल भावार्थ
इस भजन में भक्त भगवान गणेश से कहता है कि हे गौरी पुत्र गणराज! मैं किसी भी शुभ कार्य से पहले सबसे पहले आपकी पूजा और आराधना करता हूँ। आप देवताओं में श्रेष्ठ और प्रथम पूजनीय हैं।
भक्त गणेश जी को गंगाजल से स्नान कराने, केसर-चंदन का तिलक लगाने और रंग-बिरंगे फूलों से सजाने की कल्पना करता है। वह भगवान गणेश से अपनी लाज रखने और जीवन के संकटों में रक्षा करने की प्रार्थना करता है।
भजन में कहा गया है कि जो व्यक्ति भगवान गणपति को प्रथम स्मरण करता है, उसके जीवन के दुख और विघ्न दूर होते हैं तथा उसे रिद्धि-सिद्धि, सुख और संपत्ति की प्राप्ति होती है।
अंत में भक्त गणेश जी को माता पार्वती का प्यारा पुत्र और भगवान शिव का पुत्र बताते हुए उनसे अपने सभी दुख दूर करने का वरदान मांगता है।
“सबसे पहले तुम्हें मनाऊँ” भजन का धार्मिक महत्व
भगवान गणेश को सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी का स्मरण करने की परंपरा इसी भावना से जुड़ी है।
गणेश जी को कई नामों से जाना जाता है—
गणपति
गणराज
गणेश
विनायक
गजानन
गजवदन
लंबोदर
विघ्नहर्ता
गौरीसुत
एकदंत
इस भजन में विशेष रूप से गौरी सुत, गणराज, लंबोदर, गजवदन और विनायक जैसे नामों का स्मरण किया गया है।
भजन में भगवान गणेश के स्वरूप का वर्णन
भजन की पंक्तियों में भगवान गणेश के स्वरूप का भक्तिपूर्वक वर्णन किया गया है।
“सूँड़ सुन्डाला, मस्तक मोटा कान” जैसी पंक्तियाँ गणेश जी के गजमुख स्वरूप और बड़े कानों की ओर संकेत करती हैं।
“लम्बोदर गजवदन विनायक” में उनके प्रमुख नामों का स्मरण किया गया है।
लंबोदर — जिनका उदर बड़ा है।
गजवदन — जिनका मुख हाथी के समान है।
विनायक — भगवान गणेश का एक प्रसिद्ध नाम।
गणेश जी को प्रथम क्यों पूजा जाता है?
धार्मिक परंपरा में भगवान गणेश को विघ्नों को दूर करने वाला देवता माना जाता है। इसलिए किसी भी मांगलिक कार्य के आरंभ में उनका स्मरण किया जाता है।
इसी भाव को भजन की पंक्ति—
“जो गणपति को प्रथम मनाता”
में व्यक्त किया गया है।
भक्त का विश्वास है कि गणेश जी की आराधना से शुभ कार्य निर्विघ्न रूप से पूर्ण हो और जीवन की बाधाएँ दूर हों।
भजन में रिद्धि-सिद्धि का उल्लेख
भजन में कहा गया है—
“रिद्धि सिद्धि सुख सम्पति पाता”
भगवान गणेश की उपासना में रिद्धि और सिद्धि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। रिद्धि को समृद्धि तथा सिद्धि को सफलता और उपलब्धि के भाव से जोड़ा जाता है।
इसलिए भक्त गणेश जी से केवल धन ही नहीं, बल्कि सुख, समृद्धि और सफलता की भी प्रार्थना करता है।
गणेश पूजा में इस भजन का पाठ
इस भजन को भगवान गणेश की पूजा के समय श्रद्धापूर्वक गाया या पढ़ा जा सकता है।
विशेष रूप से इन अवसरों पर गणेश भजन का पाठ किया जा सकता है—
गणेश चतुर्थी
बुधवार की गणेश पूजा
किसी नए कार्य की शुरुआत
गृह प्रवेश
विवाह एवं अन्य मांगलिक कार्य
व्यवसाय का शुभारंभ
परीक्षा या महत्वपूर्ण कार्य से पहले
गणेश मंदिर में पूजा के समय
दैनिक गणेश आराधना
गणेश पूजा की सरल विधि
सबसे पहले पूजा स्थान को स्वच्छ करें और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
इसके बाद दीपक और धूप जलाकर गणेश जी का ध्यान करें।
गणेश जी को अपनी श्रद्धा के अनुसार पुष्प, दूर्वा, फल और नैवेद्य अर्पित करें।
इसके बाद इस भजन का पाठ करें—
“सबसे पहले तुम्हे मनाऊँ,
गौरी सुत गणराज...”
भजन के बाद गणेश जी से अपने परिवार की सुख-शांति और सभी शुभ कार्यों की सफलता के लिए प्रार्थना करें।
अंत में गणेश जी की आरती करके प्रसाद वितरित करें।
इस भजन को सुनने या पढ़ने का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश के भजन का श्रवण और गायन भक्त के मन में श्रद्धा और सकारात्मकता उत्पन्न करता है।
भक्त इस भजन के माध्यम से गणेश जी से—
जीवन के विघ्न दूर करने की प्रार्थना करता है।
कार्यों में सफलता की कामना करता है।
परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करता है।
धन और समृद्धि की कामना करता है।
संकट के समय भगवान का सहारा मांगता है।
मन को भगवान की भक्ति में लगाने का प्रयास करता है।
इन लाभों को धार्मिक आस्था और परंपरा के संदर्भ में समझना चाहिए।
गणेश जी का सरल मंत्र
गणेश भजन के साथ भगवान गणेश के इस प्रसिद्ध मंत्र का जाप भी किया जा सकता है—
ॐ गं गणपतये नमः॥
इस मंत्र का 108 बार जाप करके उसके बाद गणेश जी का भजन गाना भक्तिमय साधना का एक सरल तरीका हो सकता है।
गणेश जी को कौन-सी चीजें अर्पित करें?
भगवान गणेश की पूजा में परंपरा के अनुसार निम्न वस्तुएँ अर्पित की जाती हैं—
दूर्वा
लाल पुष्प
मोदक
लड्डू
फल
चंदन
सिंदूर
धूप
दीपक
नैवेद्य
पूजा सामग्री अपनी श्रद्धा और स्थानीय परंपरा के अनुसार रखी जा सकती है।
Frequently Asked Questions (FAQ)
“सबसे पहले तुम्हें मनाऊँ” भजन किस भगवान को समर्पित है?
यह भजन भगवान श्री गणेश को समर्पित है। इसमें उन्हें गौरी पुत्र, गणराज, लंबोदर और विनायक के रूप में स्मरण किया गया है।
इस भजन को कब गाना चाहिए?
इस भजन को गणेश पूजा, गणेश चतुर्थी, बुधवार, किसी नए कार्य के आरंभ या किसी भी शुभ अवसर पर श्रद्धापूर्वक गाया जा सकता है।
क्या यह भजन गणेश पूजा से पहले गाया जा सकता है?
हाँ। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य मानने की परंपरा के कारण पूजा के आरंभ में इस भजन का गायन किया जा सकता है।
गणेश जी का सबसे सरल मंत्र कौन-सा है?
भगवान गणेश का एक प्रसिद्ध सरल मंत्र है—
ॐ गं गणपतये नमः॥
भजन में “गौरी सुत गणराज” का क्या अर्थ है?
“गौरी सुत” का अर्थ माता गौरी अर्थात माता पार्वती के पुत्र और “गणराज” का अर्थ गणों के राजा या गणपति से है।
“सबसे पहले तुम्हें मनाऊँ, गौरी सुत गणराज” भगवान गणेश की भक्ति और प्रथम पूजन की भावना को व्यक्त करने वाला सुंदर गणेश भजन है। इसमें भक्त गणपति महाराज से अपने जीवन के दुख और विघ्न दूर करने, सुख-समृद्धि देने और अपनी लाज रखने की प्रार्थना करता है।
किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश का स्मरण करने की परंपरा में इस प्रकार के भजनों का विशेष स्थान है। श्रद्धा के साथ गणेश जी का नाम लेकर शुभ कार्य का आरंभ करना भक्त के लिए आस्था और सकारात्मक संकल्प का माध्यम बन सकता है।
गणपति बप्पा मोरया।
मंगल मूर्ति मोरया।