श्री रामरक्षा स्तोत्र क्या है?
श्री रामरक्षा स्तोत्र भगवान श्रीराम की कृपा और संरक्षण प्राप्त करने वाला अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। इसकी रचना ऋषि बुधकौशिक ने की थी। मान्यता है कि भगवान शिव ने स्वप्न में उन्हें यह दिव्य स्तोत्र सुनाया और जागने पर उन्होंने इसे लिख दिया।
यह स्तोत्र केवल स्तुति नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम की दिव्य शक्ति से भक्त की रक्षा करने वाला एक आध्यात्मिक कवच माना जाता है। श्रद्धा और विश्वास से इसका पाठ करने पर भय, रोग, शत्रु बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और अनेक प्रकार की कठिनाइयों से रक्षा होती है।
श्री रामरक्षा स्तोत्र का धार्मिक महत्व
रामरक्षा स्तोत्र में भगवान श्रीराम के विभिन्न रूपों और गुणों का स्मरण करते हुए शरीर के प्रत्येक अंग की रक्षा की प्रार्थना की गई है। इसलिए इसे रक्षा कवच भी कहा जाता है।
विशेष रूप से—
राम नवमी
मंगलवार
गुरुवार
श्रीराम पूजा
संकट के समय
यात्रा से पहले
बच्चों की रक्षा हेतु
इसका पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।
श्री रामरक्षा स्तोत्र का संपूर्ण पाठ
|| विनियोग: ||
अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिःध्यानम्
ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं।
पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्॥
वामाङ्कारूढसीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं।
नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलं रामचन्द्रम्॥
स्तोत्रम्
चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम्।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्॥१॥
ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम्।
जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितम्॥२॥
सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तञ्चरान्तकम्।
स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम्॥३॥
रामरक्षां पठेत्प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम्।
शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः॥४॥
कौसल्येयो दृशौ पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुती।
घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः॥५॥
जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः।
स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः॥६॥
करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित्।
मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रयः॥७॥
सुग्रीवेशः कटिं पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभुः।
ऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्॥८॥
जानुनी सेतुकृत्पातु जङ्घे दशमुखान्तकः।
पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः॥९॥
एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्।
स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्॥१०॥
पातालभूतलव्योमचारिणश्छद्मचारिणः।
न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः॥११॥
रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्।
नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति॥१२॥
जगज्जेत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्।
यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः॥१३॥
वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्।
अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्॥१४॥
आदिष्टवान्यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः।
तथा लिखितवान्प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः॥१५॥
आरामः कल्पवृक्षाणां विरामः सकलापदाम्।
अभिरामस्त्रिलोकानां रामः श्रीमान्स नः प्रभुः॥१६॥
तरुणौ रूपसम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ।
पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ॥१७॥
फलमूलाशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ।
पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ॥१८॥
शरण्यौ सर्वसत्त्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम्।
रक्षःकुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ॥१९॥
आत्तसज्जधनुषाविषुस्पृशावक्षयाशुगनिषङ्गसङ्गिनौ।
रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रतः पथि सदैव गच्छताम्॥२०॥
सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा।
गच्छन्मनोरथोऽस्माकं रामः पातु सलक्ष्मणः॥२१॥
रामो दाशरथिः शूरो लक्ष्मणानुचरो बली।
काकुत्स्थः पुरुषः पूर्णः कौसल्येयो रघूत्तमः॥२२॥
वेदान्तवेद्यो यज्ञेशः पुराणपुरुषोत्तमः।
जानकीवल्लभः श्रीमानप्रमेयपराक्रमः॥२३॥
इत्येतानि जपेन्नित्यं मद्भक्तः श्रद्धयान्वितः।
अश्वमेधाधिकं पुण्यं सम्प्राप्नोति न संशयः॥२४॥
रामं दूर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम्।
स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नराः॥२५॥
रामं लक्ष्मणपूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरम्।
काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम्॥
राजेन्द्रं सत्यसन्धं दशरथतनयं श्यामलं शान्तमूर्तिम्।
वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम्॥२६॥
रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे।
रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः॥२७॥
श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम।
श्रीराम राम भरताग्रज राम राम॥
श्रीराम राम रणकर्कश राम राम।
श्रीराम राम शरणं भव राम राम॥२८॥
श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि।
श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि।
श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि।
श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये॥२९॥
माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः।
स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्रः।
सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालुः।
नान्यं जाने नैव जाने न जाने॥३०॥
दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे तु जनकात्मजा।
पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम्॥३१॥
लोकाभिरामं रणरङ्गधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥३२॥
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥३३॥
कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम्।
आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम्॥३४॥
आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्।
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्॥३५॥
भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम्।
तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम्॥३६॥
रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रमेशं भजे।
रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः॥
रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहम्।
रामे चित्तलयः सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर॥३७॥
श्रीराम राम रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥३८॥
॥ इति श्री बुधकौशिकविरचितं श्रीरामरक्षा स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
श्री रामरक्षा स्तोत्र का सरल हिंदी अर्थ
इस स्तोत्र में भगवान श्रीराम के दिव्य स्वरूप का ध्यान करके उनसे शरीर, मन, बुद्धि और जीवन की रक्षा की प्रार्थना की गई है। प्रत्येक अंग की रक्षा के लिए श्रीराम के किसी विशेष रूप का स्मरण किया गया है। अंत में कहा गया है कि जो श्रद्धा से इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसे दीर्घायु, सुख, विजय, संतान, समृद्धि और अंततः भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है।
श्री रामरक्षा स्तोत्र पढ़ने के लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसके नियमित पाठ से—
भय और नकारात्मकता दूर होती है।
मानसिक शांति प्राप्त होती है।
यात्रा में सुरक्षा का आशीर्वाद मिलता है।
बच्चों की रक्षा के लिए शुभ माना जाता है।
रोग और संकट से संरक्षण की भावना मिलती है।
आत्मविश्वास और धैर्य बढ़ता है।
भगवान श्रीराम के प्रति भक्ति प्रगाढ़ होती है।
पाठ कब करें?
प्रतिदिन प्रातःकाल
मंगलवार
गुरुवार
राम नवमी
श्रीराम नवाह्न पाठ के समय
यात्रा से पहले
किसी महत्वपूर्ण कार्य के आरंभ से पूर्व
पाठ की विधि
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान श्रीराम, सीता, लक्ष्मण और हनुमानजी का ध्यान करें।
दीपक और धूप अर्पित करें।
"श्रीराम जय राम जय जय राम" मंत्र का जप करें।
श्रद्धा से रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करें।
अंत में श्रीराम की आरती और प्रार्थना करें।
श्री रामरक्षा स्तोत्र का आध्यात्मिक संदेश
यह स्तोत्र हमें सिखाता है कि सच्ची सुरक्षा केवल बाहरी साधनों से नहीं, बल्कि धर्म, सत्य, मर्यादा और भगवान के स्मरण से प्राप्त होती है। श्रीराम का नाम मनुष्य को साहस, संयम और जीवन की कठिन परिस्थितियों में सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
FAQ
1. श्री रामरक्षा स्तोत्र किसने लिखा?
ऋषि बुधकौशिक ने इसकी रचना की थी।
2. क्या महिलाएँ रामरक्षा स्तोत्र पढ़ सकती हैं?
हाँ, स्त्री और पुरुष दोनों श्रद्धा से इसका पाठ कर सकते हैं।
3. क्या प्रतिदिन रामरक्षा स्तोत्र पढ़ना चाहिए?
हाँ, नित्य पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।
4. क्या इसे बच्चों के लिए पढ़ सकते हैं?
हाँ, कई परिवार बच्चों की मंगलकामना और सुरक्षा के लिए इसका पाठ करते हैं।
5. रामरक्षा स्तोत्र का सबसे प्रसिद्ध श्लोक कौन सा है?
"आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्। लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्॥" अत्यंत लोकप्रिय और व्यापक रूप से जपा जाने वाला श्लोक है।
श्री रामरक्षा स्तोत्र भगवान श्रीराम की कृपा और संरक्षण प्राप्त करने वाला अद्भुत आध्यात्मिक कवच है। श्रद्धा, विश्वास और नियमित अभ्यास के साथ इसका पाठ करने से मन में शांति, जीवन में साहस और भगवान श्रीराम के प्रति गहरी भक्ति का संचार होता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का स्मरण ही इस स्तोत्र का सबसे बड़ा संदेश है।
॥ श्रीरामचन्द्रार्पणमस्तु ॥
॥ जय श्रीराम ॥