ऊँ नमः कमलवासिन्यै नारायण्यै नमो नमः" माता महालक्ष्मी को समर्पित एक अत्यंत पवित्र स्तुति मंत्र है। इस मंत्र में देवी लक्ष्मी के कमलवासिनी (कमल में निवास करने वाली) तथा नारायणी (भगवान नारायण की दिव्य शक्ति) स्वरूप की वंदना की जाती है। श्रद्धालु इस मंत्र का जप माता महालक्ष्मी की कृपा, सुख-समृद्धि, सौभाग्य, शांति और आध्यात्मिक उन्नति की कामना से करते हैं।
यह मंत्र विशेष रूप से शुक्रवार, दीपावली, धनतेरस, कोजागरी पूर्णिमा, वरलक्ष्मी व्रत तथा महालक्ष्मी पूजा के अवसर पर अत्यंत शुभ माना जाता है।
महालक्ष्मी स्तोत्र
पद्मपत्रेक्षणायै च पद्मास्यायै नमो नम: ।
पद्मासनायै पद्मिन्यै वैष्णव्यै च नमो नम: ॥2॥
सर्वसम्पत्स्वरूपायै सर्वदात्र्यै नमो नम: ।
सुखदायै मोक्षदायै सिद्धिदायै नमो नम: ॥3॥
हरिभक्तिप्रदात्र्यै च हर्षदात्र्यै नमो नम: ।
कृष्णवक्ष:स्थितायै च कृष्णेशायै नमो नम: ॥4॥
कृष्णशोभास्वरूपायै रत्नपद्मे च शोभने ।
सम्पत्त्यधिष्ठातृदेव्यै महादेव्यै नमो नम: ॥5॥
शस्याधिष्ठातृदेव्यै च शस्यायै च नमो नम: ।
नमो बुद्धिस्वरूपायै बुद्धिदायै नमो नम: ॥6॥
वैकुण्ठे या महालक्ष्मीर्लक्ष्मी: क्षीरोदसागरे ।
स्वर्गलक्ष्मीरिन्द्रगेहे राजलक्ष्मीर्नृपालये ॥7॥
गृहलक्ष्मीश्च गृहिणां गेहे च गृहदेवता ।
सुरभी सा गवां माता दक्षिणा यज्ञकामिनी ॥8॥
अदितिर्देवमाता त्वं कमला कमलालये ।
स्वाहा त्वं च हविर्दाने कव्यदाने स्वधा स्मृता ॥9॥
त्वं हि विष्णुस्वरूपा च सर्वाधारा वसुन्धरा ।
शुद्धसत्त्वस्वरूपा त्वं नारायणपरायणा ॥10॥
क्रोधहिंसावर्जिता च वरदा च शुभानना ।
परमार्थप्रदा त्वं च हरिदास्यप्रदा परा ॥11॥
यया विना जगत् सर्वं भस्मीभूतमसारकम् ।
जीवन्मृतं च विश्वं च शवतुल्यं यया विना ॥12॥
सर्वेषां च परा त्वं हि सर्वबान्धवरूपिणी ।
यया विना न सम्भाष्यो बान्धवैर्बान्धव: सदा ॥13॥
त्वया हीनो बन्धुहीनस्त्वया युक्त: सबान्धव: ।
धर्मार्थकाममोक्षाणां त्वं च कारणरूपिणी ॥14॥
यथा माता स्तनन्धानां शिशूनां शैशवे सदा ।
तथा त्वं सर्वदा माता सर्वेषां सर्वरूपत: ॥15॥
मातृहीन: स्तनत्यक्त: स चेज्जीवति दैवत: ।
त्वया हीनो जन: कोsपि न जीवत्येव निश्चितम् ॥16॥
सुप्रसन्नस्वरूपा त्वं मां प्रसन्ना भवाम्बिके ।
वैरिग्रस्तं च विषयं देहि मह्यं सनातनि ॥17॥
वयं यावत् त्वया हीना बन्धुहीनाश्च भिक्षुका: ।
सर्वसम्पद्विहीनाश्च तावदेव हरिप्रिये ॥18॥
राज्यं देहि श्रियं देहि बलं देहि सुरेश्वरि ।
कीर्तिं देहि धनं देहि यशो मह्यं च देहि वै ॥19॥
कामं देहि मतिं देहि भोगान् देहि हरिप्रिये ।
ज्ञानं देहि च धर्मं च सर्वसौभाग्यमीप्सितम् ॥20॥
प्रभावं च प्रतापं च सर्वाधिकारमेव च ।
जयं पराक्रमं युद्धे परमैश्वर्यमेव च ॥21॥
फलश्रुति:
इदं स्तोत्रं महापुण्यं त्रिसंध्यं य: पठेन्नर: ।
कुबेरतुल्य: स भवेद् राजराजेश्वरो महान् ॥
सिद्धस्तोत्रं यदि पठेत् सोsपि कल्पतरुर्नर: ।
पंचलक्षजपेनैव स्तोत्रसिद्धिर्भवेन्नृणाम् ॥
सिद्धिस्तोत्रं यदि पठेन्मासमेकं च संयत: ।
महासुखी च राजेन्द्रो भविष्यति न संशय: ॥
महालक्ष्मी स्तोत्र क्या है?
महालक्ष्मी स्तोत्र देवी लक्ष्मी की महिमा का गुणगान करने वाला स्तोत्र है। "ऊँ नमः कमलवासिन्यै नारायण्यै नमो नमः" इसकी अत्यंत लोकप्रिय पंक्ति है, जो माता लक्ष्मी के दिव्य स्वरूप को प्रणाम करती है।
माता लक्ष्मी केवल धन की देवी नहीं हैं, बल्कि वे—
- समृद्धि
- सौभाग्य
- अन्न
- ऐश्वर्य
- संतोष
- करुणा
- मंगल
- आध्यात्मिक समृद्धि
की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं।
मंत्र का अर्थ
इस मंत्र का प्रत्येक शब्द गहन आध्यात्मिक महत्व रखता है—
- ऊँ (ॐ) – परम ब्रह्म की दिव्य ध्वनि।
- नमः – श्रद्धापूर्वक प्रणाम।
- कमलवासिन्यै – कमल में निवास करने वाली माता लक्ष्मी को।
- नारायण्यै – भगवान नारायण की दिव्य शक्ति एवं अर्धांगिनी।
- नमो नमः – बार-बार प्रणाम एवं पूर्ण समर्पण।
सरल अर्थ
"हे कमल पर विराजमान भगवान नारायण की दिव्य शक्ति माता महालक्ष्मी! मैं आपको बार-बार श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूँ। कृपया मुझ पर अपनी कृपा बनाए रखें।"
माता महालक्ष्मी का महत्व
सनातन धर्म में माता लक्ष्मी को भगवान विष्णु की अर्धांगिनी माना जाता है। जहाँ भगवान विष्णु धर्म और पालन के प्रतीक हैं, वहीं माता लक्ष्मी समृद्धि, सौभाग्य और मंगल की अधिष्ठात्री हैं।
माता लक्ष्मी के प्रमुख स्वरूप—
- आदि लक्ष्मी
- धन लक्ष्मी
- धान्य लक्ष्मी
- गज लक्ष्मी
- संतान लक्ष्मी
- विजय लक्ष्मी
- विद्या लक्ष्मी
- धैर्य लक्ष्मी
इन आठ स्वरूपों को अष्टलक्ष्मी कहा जाता है।
कमल का आध्यात्मिक महत्व
माता लक्ष्मी को सदैव कमल पर विराजमान दर्शाया जाता है। कमल का अर्थ है—
- पवित्रता
- निर्मलता
- आध्यात्मिक विकास
- संसार में रहते हुए भी आसक्ति से मुक्त रहना
- शुभता और सौंदर्य
कमल हमें यह शिक्षा देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी अपने गुणों और चरित्र की पवित्रता बनाए रखें।
महालक्ष्मी स्तोत्र का महत्व
यह स्तोत्र केवल धन प्राप्ति के लिए नहीं है। यह हमें प्रेरित करता है—
- धर्मपूर्वक धन अर्जित करें।
- दान और सेवा करें।
- संतोष रखें।
- परिवार में प्रेम बनाए रखें।
- ईश्वर के प्रति कृतज्ञ रहें।
- धन का सदुपयोग करें।
महालक्ष्मी स्तोत्र के आध्यात्मिक लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और नियमित पाठ से निम्नलिखित आध्यात्मिक लाभ प्राप्त हो सकते हैं—
1. मानसिक शांति
माता लक्ष्मी का स्मरण मन को शांत एवं सकारात्मक बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
2. सकारात्मक ऊर्जा
मंत्र जप जीवन में आशा, उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाने की प्रेरणा देता है।
3. सौभाग्य की भावना
धार्मिक परंपरा में इसे शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है।
4. पारिवारिक सुख
घर में प्रेम, शांति और सौहार्द बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।
5. आध्यात्मिक उन्नति
ईश्वर के प्रति श्रद्धा, भक्ति और आत्मचिंतन की भावना विकसित होती है।
6. धन के प्रति सही दृष्टिकोण
यह स्तोत्र सिखाता है कि धन तभी सार्थक है जब उसका उपयोग धर्म, सेवा और लोककल्याण में किया जाए।
महत्वपूर्ण सूचना: उपर्युक्त लाभ धार्मिक एवं आध्यात्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें किसी प्रकार की निश्चित आर्थिक, चिकित्सकीय या चमत्कारी गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।
महालक्ष्मी स्तोत्र का पाठ कब करें?
इस स्तोत्र का पाठ निम्न अवसरों पर विशेष शुभ माना जाता है—
- प्रतिदिन प्रातःकाल
- शुक्रवार
- दीपावली
- धनतेरस
- शरद पूर्णिमा
- कोजागरी पूर्णिमा
- वरलक्ष्मी व्रत
- अक्षय तृतीया
- लक्ष्मी पूजा
पाठ विधि
1. स्नान एवं शुद्धता
स्नान कर स्वच्छ एवं हल्के पीले, गुलाबी या सफेद वस्त्र धारण करें।
2. पूजा स्थान तैयार करें
माता महालक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र के सामने घी का दीपक जलाएँ।
3. पूजन सामग्री
- कमल का पुष्प (यदि उपलब्ध हो)
- लाल या गुलाबी पुष्प
- चंदन
- धूप
- दीप
- फल
- मिठाई
- नारियल
4. ध्यान करें
माता महालक्ष्मी के कमलासन पर विराजमान स्वरूप का ध्यान करें।
5. स्तोत्र का पाठ
पूर्ण श्रद्धा, शुद्ध उच्चारण और एकाग्रता के साथ स्तोत्र का पाठ करें।
महालक्ष्मी स्तोत्र का आध्यात्मिक संदेश
माता महालक्ष्मी हमें सिखाती हैं कि वास्तविक समृद्धि केवल धन-संपत्ति नहीं है। स्वास्थ्य, परिवार, ज्ञान, सदाचार, संतोष और ईश्वर की कृपा भी जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति हैं।
जो व्यक्ति सत्य, परिश्रम, दान, सेवा और विनम्रता का पालन करता है, उसी के जीवन में स्थायी लक्ष्मी का वास होता है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. "ऊँ नमः कमलवासिन्यै नारायण्यै नमो नमः" किस देवी का मंत्र है?
यह माता महालक्ष्मी की स्तुति का पवित्र मंत्र है।
2. इस स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?
प्रतिदिन किया जा सकता है, लेकिन शुक्रवार, दीपावली और धनतेरस पर इसका विशेष महत्व माना जाता है।
3. क्या महिलाएं भी इसका पाठ कर सकती हैं?
हाँ, यह स्तोत्र सभी श्रद्धालुओं के लिए उपयुक्त है।
4. क्या इस स्तोत्र से धन प्राप्त होता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्तोत्र माता लक्ष्मी की कृपा का माध्यम है। जीवन में आर्थिक प्रगति के लिए परिश्रम, ईमानदारी और सही वित्तीय निर्णय भी आवश्यक हैं।
5. क्या इस स्तोत्र का पाठ घर में किया जा सकता है?
हाँ, श्रद्धा और विधि के अनुसार घर में भी इसका नियमित पाठ किया जा सकता है।
"ऊँ नमः कमलवासिन्यै नारायण्यै नमो नमः" माता महालक्ष्मी की महिमा का अत्यंत पवित्र स्तुति मंत्र है। यह हमें धन के साथ धर्म, विनम्रता, संतोष और सेवा का महत्व समझाता है। श्रद्धा एवं नियमित पाठ से मन में सकारात्मकता, कृतज्ञता और आध्यात्मिक शांति की भावना विकसित होती है। माता महालक्ष्मी की कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और मंगल का मार्ग प्रशस्त होता है।
अन्य माता लक्ष्मी मंत्र एवं स्तोत्र
यदि आपको महालक्ष्मी स्तोत्र पसंद आया, तो आप ये पाठ भी पढ़ सकते हैं—
- श्री सूक्त
- महालक्ष्मी अष्टकम
- कनकधारा स्तोत्र
- लक्ष्मी गायत्री मंत्र
- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
- ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः
- लक्ष्मी चालीसा
- अष्टलक्ष्मी स्तोत्र
- श्री कुबेर मंत्र
- लक्ष्मी-नारायण पूजा विधि