02 Mar 2026 आध्यात्मिक मार्गदर्शन विश्वसनीय जानकारी

तोरा मन दर्पन कहलाये

तोरा मन दर्पन कहलाये प्राणी अपने प्रभु से पूछे किस विधी पाऊँ तोहे प्रभु कहे तु मन को पा ले, पा जयेगा मोहे तोरा मन दर्पण कहलाये - २ भले बुरे सारे कर्मों को, देखे और दिखाये तोरा मन दर्पण कहलाये - २ मन ही देवता, मन ही ईश्वर, मन से बड़ा न कोय मन उजियारा जब जब फैले, जग उजियारा होय इस उजले दर्पण पे प्राणी, धूल न जमने पाये तोरा मन दर्पण कहलाये - २ सुख की कलियाँ, दुख के कांटे, मन सबका आधार मन से कोई बात छुपे ना, मन के नैन हज़ार जग से चाहे भाग लो कोई, मन से भाग न पाये तोरा मन दर्पण कहलाये - २ तन की दौलत ढलती छाया मन का धन अनमोल तन के कारण मन के धन को मत माटि मेइन रौंद मन की क़दर भुलाने वाला हीराँ जनम गवाये तोरा मन दर्पण कहलाये
डिसक्लेमर: इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।