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वाराही मूल मंत्र

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वाराही मूल मंत्र

महा वाराही देवी, माता वाराही का अत्यंत शक्तिशाली स्वरूप मानी जाती हैं। माता वाराही को शक्ति, संरक्षण, विजय और नकारात्मक शक्तियों के निवारण से संबंधित देवी के रूप में पूजा जाता है। प्रस्तुत मंत्र को श्री महा वाराही मूल मंत्र के नाम से जाना जाता है।

श्री महा वाराही मूल मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ऐं ग्लौं ऐं नमो भगवति वर्तालि वर्तालि 

वाराहि वाराहि वराहमुखि वराहमुखि अन्धे अन्धिनि नमः।
रुण्धे रुण्धिनि नमः। जंभे जंभिनि नमः। मोहे मोहिनि नमः।
स्तम्भे स्तम्भिनि नमः। सर्वदुष्टप्रदुष्टानां सर्वेषां 

सर्ववाक्-सिद्धि-सच्चुर-मुखागति जिह्वा स्तम्भनं कुरु कुरु।
शीघ्रं वश्यं ऐं ग्लौं ता हा इताहा थाहा थाहा हुं अस्त्राय फट् स्वाहा॥

॥ इति श्री महा वाराही मूल मंत्र ॥

महा वाराही मंत्र का महत्व

माता वाराही को देवी शक्ति के उग्र और रक्षक स्वरूपों में से एक माना जाता है। साधना परंपरा में वाराही देवी की उपासना को आत्मबल, सुरक्षा, बाधाओं के निवारण और आध्यात्मिक शक्ति से जोड़ा जाता है। इस मंत्र में बीज मंत्रों के साथ माता वाराही का आवाहन किया जाता है।

मंत्र में प्रयुक्त विभिन्न बीजाक्षरों का अपना आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। साधक श्रद्धा और नियमपूर्वक मंत्र का जाप करके माता वाराही की कृपा का स्मरण करता है।

मंत्र जाप की सामान्य विधि

महा वाराही मंत्र का जाप करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना और पूजा स्थल को स्वच्छ रखना उचित माना जाता है। माता का ध्यान करके दीपक और धूप अर्पित करें तथा श्रद्धापूर्वक मंत्र का जाप करें।

  • प्रातः या संध्या के समय शांत स्थान पर बैठें।
  • माता वाराही का ध्यान करें।
  • संकल्प लेकर श्रद्धापूर्वक मंत्र का जाप करें।
  • जाप के दौरान मन को शांत और एकाग्र रखने का प्रयास करें।
  • जाप पूर्ण होने के बाद माता को प्रणाम करें और अपनी प्रार्थना निवेदित करें।

मंत्र जाप में सावधानी

यह एक उग्र एवं तांत्रिक परंपरा से संबंधित मंत्र माना जाता है। इसलिए इसके विशेष अनुष्ठान, पुरश्चरण या तांत्रिक प्रयोग किसी योग्य गुरु या आचार्य के मार्गदर्शन में ही करना उचित है। सामान्य श्रद्धापूर्वक पाठ करते समय मंत्र के शुद्ध उच्चारण और साधना के नियमों का ध्यान रखना चाहिए।

माता वाराही की उपासना

माता वाराही की उपासना में श्रद्धा, संयम और सात्त्विक भाव को महत्वपूर्ण माना जाता है। साधक को किसी भी प्रकार की हानि या अनुचित उद्देश्य के लिए मंत्र का प्रयोग करने के बजाय आध्यात्मिक उन्नति, आत्मरक्षा और सद्भावना की भावना से देवी का स्मरण करना चाहिए।

श्री महा वाराही मंत्र का पाठ

माता वाराही के भक्त इस मंत्र का पाठ श्रद्धापूर्वक कर सकते हैं। मंत्र साधना में केवल मंत्र के शब्दों की अपेक्षा साधक की श्रद्धा, एकाग्रता, नियम और उचित मार्गदर्शन को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

जय माता वाराही। माता वाराही सभी भक्तों को शक्ति, साहस, सद्बुद्धि और आध्यात्मिक संरक्षण प्रदान करें।