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भाद्रपद पूर्णिमा व्रत : पूजा विधि, महत्व और व्रत कथा

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भाद्रपद पूर्णिमा व्रत : पूजा विधि, महत्व और व्रत कथा
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि को भाद्रपद पूर्णिमा व्रत किया जाता है। इस दिन स्नान, दान, हवन, और सत्यनारायण व्रत कथा का आयोजन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसे रात्रि में चंद्र दर्शन और पूजन के लिए भी अत्यंत शुभ माना गया है।

भाद्रपद पूर्णिमा का महत्व

  • इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा का विधान है।
  • सत्यनारायण व्रत कथा का आयोजन कर घर-परिवार की समृद्धि की कामना की जाती है।
  • दान और तर्पण से पितरों की कृपा प्राप्त होती है।
  • चंद्रमा की पूजा कर मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

भाद्रपद पूर्णिमा पूजा विधि

  1. प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
  2. भगवान विष्णु और सत्यनारायण की पूजा करें।
  3. सत्यनारायण कथा का श्रवण और पाठ करें।
  4. फल, पुष्प, मिष्ठान्न और तुलसीदल अर्पित करें।
  5. संध्या समय चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित कर दीपदान करें।

भाद्रपद पूर्णिमा व्रत कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, भाद्रपद पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने और करने से घर-परिवार में सुख-शांति आती है। यह कथा विशेष रूप से विष्णु भक्तों के लिए कल्याणकारी मानी गई है।

भाद्रपद पूर्णिमा व्रत से लाभ

  1. धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  2. पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
  3. भगवान विष्णु की कृपा से सभी संकट दूर होते हैं।
  4. मानसिक शांति और पारिवारिक सुख की वृद्धि होती है।