अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरम्
"अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरम्, राम नारायणं जानकी वल्लभम्" भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम की महिमा का अत्यंत लोकप्रिय और मधुर भजन है। यह भजन भक्त और भगवान के बीच अटूट प्रेम, समर्पण और विश्वास का संदेश देता है। इसकी प्रत्येक पंक्ति यह बताती है कि भगवान केवल सच्ची भक्ति, प्रेम और निष्कपट भावना से प्रसन्न होते हैं।
देश-विदेश के मंदिरों, सत्संगों, भजन संध्याओं और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, राम नवमी तथा अन्य धार्मिक आयोजनों में यह भजन अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जाता है।
भजन
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
कौन कहता हे भगवान आते नहीं,तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं ।
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
कौन कहता है भगवान खाते नहीं, बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं ।
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
कौन कहता है भगवान सोते नहीं,माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं ।
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
कौन कहता है भगवान नाचते नहीं, गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं ।
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
नाम जपते चलो काम करते चलो,हर समय कृष्ण का ध्यान करते चलो ।
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
याद आएगी उनको कभी ना कभी, कृष्ण दर्शन तो देंगे कभी ना कभी ।
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
भजन का भावार्थ
इस भजन में भगवान के अनेक दिव्य नामों—अच्युत, केशव, कृष्ण, दामोदर, राम, नारायण और जानकी वल्लभ—का स्मरण किया गया है। प्रत्येक नाम भगवान के किसी विशेष गुण, लीला या स्वरूप का परिचय देता है।
भजन की प्रसिद्ध पंक्तियाँ—
"कौन कहता है भगवान आते नहीं,
तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं।"
यह संदेश देती हैं कि भगवान आज भी अपने सच्चे भक्तों की पुकार अवश्य सुनते हैं। यदि भक्त मीरा जैसी निष्काम भक्ति और प्रेम रखे, तो भगवान स्वयं उसकी रक्षा और मार्गदर्शन के लिए उपस्थित होते हैं।
शबरी के बेर का संदेश
"कौन कहता है भगवान खाते नहीं,
बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं।"
यह पंक्ति रामायण की उस प्रेरणादायक घटना की याद दिलाती है, जब भगवान श्रीराम ने माता शबरी के प्रेमपूर्वक अर्पित किए हुए बेर स्वीकार किए। इससे स्पष्ट होता है कि भगवान को भोग का वैभव नहीं, बल्कि भक्त की भावना प्रिय होती है।
माँ यशोदा का वात्सल्य
"कौन कहता है भगवान सोते नहीं,
माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं।"
भगवान श्रीकृष्ण ने बाल रूप में माँ यशोदा के स्नेह और वात्सल्य का आनंद लिया। यह प्रसंग हमें बताता है कि प्रेम और ममता से भगवान को भी बाँधा जा सकता है।
गोपियों की प्रेम-भक्ति
"कौन कहता है भगवान नाचते नहीं,
गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं।"
वृंदावन की गोपियों का श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम निष्काम भक्ति का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है। यह पंक्ति हमें पूर्ण समर्पण और प्रेममयी भक्ति का महत्व समझाती है।
नामस्मरण का महत्व
भजन की अंतिम पंक्तियाँ—
"नाम जपते चलो, काम करते चलो,
हर समय कृष्ण का ध्यान करते चलो।"
जीवन का अत्यंत सरल और गहन संदेश देती हैं। मनुष्य अपने दैनिक कार्य करते हुए भी भगवान का स्मरण कर सकता है। निरंतर नामजप से मन शांत होता है, सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
भजन का आध्यात्मिक महत्व
भगवान श्रीकृष्ण एवं श्रीराम के प्रति श्रद्धा और प्रेम बढ़ाता है।
निष्काम भक्ति और पूर्ण समर्पण का संदेश देता है।
भगवान की लीलाओं का स्मरण कराता है।
मन को शांति, आनंद और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
नामस्मरण की महिमा का सरल और प्रेरणादायक वर्णन करता है।
भजन गाने के लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धापूर्वक इस भजन का गायन या श्रवण करने से—
मन में भक्ति और विश्वास बढ़ता है।
मानसिक तनाव और नकारात्मक विचारों में कमी आती है।
घर में सुख, शांति और सकारात्मक वातावरण बनता है।
भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना प्रबल होती है।
आध्यात्मिक उन्नति तथा मन की एकाग्रता में सहायता मिलती है।
जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने का आत्मबल प्राप्त होता है।
भजन कब गाना चाहिए?
इस भजन का गायन निम्न अवसरों पर विशेष शुभ माना जाता है—
प्रतिदिन प्रातः एवं संध्याकाल
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
राम नवमी
एकादशी
श्रीमद्भागवत कथा
भजन संध्या एवं सत्संग
मंदिर पूजा एवं पारिवारिक धार्मिक कार्यक्रम
"अच्युत", "केशव" और "दामोदर" नामों का अर्थ
अच्युत – जो कभी अपने स्वरूप से विचलित न हों, जो अविनाशी हों।
केशव – भगवान विष्णु एवं श्रीकृष्ण का एक पवित्र नाम, जिसका संबंध दैत्य केशी के वध और दिव्य तेज से माना जाता है।
दामोदर – वह स्वरूप जिसमें बालक श्रीकृष्ण को माता यशोदा ने प्रेमपूर्वक रस्सी से बाँधा था। यह नाम भगवान की करुणा और भक्तवत्सलता का प्रतीक है।
"अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरम्" केवल एक मधुर भजन नहीं, बल्कि भक्ति, प्रेम, समर्पण और नामस्मरण का अमूल्य संदेश है। यह भजन हमें सिखाता है कि भगवान तक पहुँचने का मार्ग आडंबर नहीं, बल्कि सच्चा प्रेम, निष्कपट भावना और निरंतर स्मरण है। जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान के नाम का जप करता है, उसके जीवन में आध्यात्मिक शांति, आत्मबल और सकारात्मकता का संचार होता है।
॥ अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरम् ।
राम नारायणं जानकी वल्लभम् ॥
॥ जय श्रीकृष्ण ॥
॥ जय श्रीराम ॥
FAQ
Q. "अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरम्" भजन किसे समर्पित है?
यह भजन भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम के दिव्य स्वरूपों की स्तुति और नामस्मरण को समर्पित है।
Q. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
यह भजन सिखाता है कि भगवान सच्चे प्रेम, श्रद्धा और निष्काम भक्ति से प्रसन्न होते हैं। मीरा, शबरी, माँ यशोदा और वृंदावन की गोपियों के उदाहरण इसी सत्य को दर्शाते हैं।
Q. इस भजन का पाठ कब करना चाहिए?
प्रातःकाल, संध्याकाल, एकादशी, जन्माष्टमी, राम नवमी, सत्संग और भजन संध्या में इसका गायन विशेष शुभ माना जाता है।