29 Jan 2026 Spiritual Guidance Trusted Information

विश्वकर्मा

vishwakarma

विश्वकर्मा हिंदू धर्म में देवताओं के वास्तुकार और दिव्य शिल्पकार के रूप में माने जाते हैं। उन्हें सभी प्रकार के निर्माण, शिल्प, और तकनीकी कार्यों के देवता के रूप में पूजा जाता है। विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का सबसे बड़ा इंजीनियर और कारीगर माना जाता है, जिन्होंने देवताओं के लिए स्वर्गलोक, अस्त्र-शस्त्र, रथ, और अद्भुत भवनों का निर्माण किया।

विश्वकर्मा का स्वरूप और विशेषताएँ

स्वरूप: विश्वकर्मा का स्वरूप उन्हें एक शिल्पकार, आर्किटेक्ट और इंजीनियर के रूप में दर्शाता है। उनके हाथों में विभिन्न शिल्पकला उपकरण होते हैं, जैसे कि एक शिल्पकारी औजार, एक छेनी, और एक मापने का यंत्र। उनका वाहन हंस है, जो ज्ञान और विवेक का प्रतीक है।

नाम और महिमा: विश्वकर्मा को 'सृष्टि के निर्माता' और 'दिव्य कारीगर' के रूप में भी जाना जाता है। उनके नाम का अर्थ ही 'विश्व का निर्माण करने वाला' है।

विश्वकर्मा से जुड़ी प्रमुख कथाएँ और रचनाएँ

स्वर्गलोक और देवताओं के महल: विश्वकर्मा ने स्वर्गलोक, इंद्र का महल, और देवताओं के अन्य दिव्य निवास स्थानों का निर्माण किया। यह कहा जाता है कि उन्होंने सोने, चांदी, और कीमती रत्नों से इन अद्भुत संरचनाओं का निर्माण किया।

लंकापुरी: विश्वकर्मा ने राक्षसराज रावण के लिए सोने की लंका का निर्माण किया था। यह अद्भुत नगरी अपनी भव्यता और वैभव के लिए प्रसिद्ध थी।

द्वारका नगरी: भगवान कृष्ण के लिए उन्होंने द्वारका नगरी का निर्माण किया, जो समुद्र में एक विशाल और सुरक्षित नगरी थी। द्वारका की अद्वितीयता और भव्यता विश्वकर्मा के शिल्पकला कौशल का प्रतीक है।

अस्त्र-शस्त्र: देवताओं के प्रमुख अस्त्र-शस्त्र, जैसे इंद्र का वज्र और शिव का त्रिशूल, भी विश्वकर्मा द्वारा निर्मित माने जाते हैं।

विश्वकर्मा पूजा

विश्वकर्मा की पूजा मुख्य रूप से कारीगर, शिल्पकार, इंजीनियर, और निर्माण कार्यों से जुड़े लोग करते हैं। विश्वकर्मा पूजा विशेष रूप से भारत में बड़े धूमधाम से मनाई जाती है, खासकर सितंबर और अक्टूबर के महीनों में। इस दिन फैक्ट्रियों, कार्यशालाओं, और औद्योगिक स्थलों पर मशीनों और औजारों की पूजा की जाती है, और उनके अच्छे कार्य और सुरक्षा की कामना की जाती है। यह दिन श्रम और शिल्पकला के सम्मान का प्रतीक माना जाता है।

विश्वकर्मा का महत्व

विश्वकर्मा का महत्व केवल धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे निर्माण और सृजन के देवता हैं, जो यह सिखाते हैं कि श्रम, रचनात्मकता, और तकनीकी ज्ञान जीवन के निर्माण और समृद्धि के लिए कितने आवश्यक हैं। विश्वकर्मा का आदर्श यह है कि मेहनत और शिल्पकला के माध्यम से हम न केवल अपने जीवन को, बल्कि समाज को भी बेहतर बना सकते हैं।

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