29 Jan 2026 Spiritual Guidance Trusted Information

श्री विश्वकर्मा जी की आरती | भगवान विश्वकर्मा की पूजा और आरती

vishwakarma
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा । सकल सृष्टि के करता, रक्षक स्तुति धर्मा ॥ आदि सृष्टि मे विधि को, श्रुति उपदेश दिया । जीव मात्र का जग मे, ज्ञान विकास किया ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा । ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई । ऋषि अंगीरा तप से, शांति नहीं पाई ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा । रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना । संकट मोचन बनकर, दूर दुःखा कीना ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा । जब रथकार दंपति, तुम्हारी टेर करी । सुनकर दीन प्रार्थना, विपत हरी सगरी ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा । एकानन चतुरानन, पंचानन राजे। त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज, सकल रूप साजे ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा । ध्यान धरे तब पद का, सकल सिद्धि आवे । मन द्विविधा मिट जावे, अटल शक्ति पावे ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा । श्री विश्वकर्मा की आरती, जो कोई गावे । भजत गजानांद स्वामी, सुख संपाति पावे ॥ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा । सकल सृष्टि के करता, रक्षक स्तुति धर्मा॥ श्री विश्वकर्मा जी की आरती भगवान विश्वकर्मा को समर्पित एक भक्तिपूर्ण आरती है, जो उनकी दिव्यता, सृजनशीलता और संरचना शक्ति का गुणगान करती है। भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के महान वास्तुकार और देवताओं के शिल्पकार के रूप में पूजा जाता है। उनकी आरती करने से व्यक्ति को कार्य में सफलता, समृद्धि और नवीनता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

श्री विश्वकर्मा जी की आरती का महत्व

शिल्प, निर्माण और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए शुभ
भगवान विश्वकर्मा को सभी प्रकार की रचनात्मकता, निर्माण और शिल्पकला का अधिष्ठाता माना जाता है। इंजीनियरों, वास्तुकारों, कारीगरों, तकनीशियनों और उद्योगपतियों के लिए यह आरती अत्यंत लाभकारी होती है।
सृजनात्मकता और सफलता का आशीर्वाद
आरती करने से व्यक्ति के कार्यों में नवीनता और सफलता प्राप्त होती है। नई तकनीकों, उद्योगों और मशीनों के क्षेत्र में कार्य करने वालों के लिए यह विशेष फलदायी होती है।
नकारात्मकता से बचाव और कार्यों में उन्नति
इस आरती को गाने से जीवन और कार्यक्षेत्र में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं। व्यापार, उद्योग और मशीनरी में तरक्की होती है।
विशेष अवसरों पर आरती का महत्व
विश्वकर्मा जयंती (17 सितंबर या दीपावली के अगले दिन) पर इस आरती का विशेष महत्व है। इसे कारखानों, मशीनों, वाहनों और औद्योगिक स्थानों में गाने से विशेष लाभ प्राप्त होता है।

श्री विश्वकर्मा जी की आरती करने के लाभ

  1. कार्यक्षेत्र में उन्नति और समृद्धि प्राप्त होती है।
  2. निर्माण और तकनीकी क्षेत्र में नए अवसर मिलते हैं।
  3. सभी प्रकार की मशीनों, उद्योगों और व्यापार में सफलता मिलती है।
  4. कार्यों में आने वाली बाधाएँ समाप्त होती हैं और नवीन ऊर्जा प्राप्त होती है।
  5. भगवान विश्वकर्मा की कृपा से जीवन में स्थिरता और आर्थिक समृद्धि बनी रहती है।
जय श्री विश्वकर्मा जी!
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