29 Jan 2026 Spiritual Guidance Trusted Information

कराग्रे वसते लक्ष्मी मंत्र

karagre-vasate-laksmi

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती । करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम ॥

अर्थ:

कराग्रे वसते लक्ष्मीः — हाथों की अग्र भाग (अंगुलियों के सिरे) पर देवी लक्ष्मी का वास है, जो धन और समृद्धि की प्रतीक हैं। करमध्ये सरस्वती — हाथों के मध्य भाग में देवी सरस्वती का वास है, जो विद्या और ज्ञान की देवी हैं। करमूले तु गोविन्दः — हाथों की जड़ (पैर के पास) में भगवान गोविन्द (विष्णु) का वास है, जो संरक्षण और स्थिरता के प्रतीक हैं। प्रभाते करदर्शनम् — सुबह उठते ही अपने हाथों के दर्शन करना चाहिए। यह श्लोक हमें हर सुबह अपने हाथों को देखकर देवी लक्ष्मी, सरस्वती और भगवान विष्णु का स्मरण करने के लिए प्रेरित करता है। यह शुभता, ज्ञान, और संरक्षण की कामना के साथ दिन की शुरुआत का प्रतीक है।

इस श्लोक का भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व है। यह श्लोक सुबह जागने पर सबसे पहले अपने हाथों के दर्शन करने की परंपरा और उसके पीछे के आध्यात्मिक विचार को व्यक्त करता है। इसका महत्व इस प्रकार है:

धन और समृद्धि की कामना:

कराग्रे वसते लक्ष्मीः — अंगुलियों के सिरे पर देवी लक्ष्मी का वास माना गया है। इसका उद्देश्य यह है कि व्यक्ति सुबह सबसे पहले धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी लक्ष्मी का आह्वान करे, ताकि दिनभर की गतिविधियों में सफलता और आर्थिक समृद्धि मिले।

ज्ञान और विद्या की प्राप्ति

करमध्ये सरस्वती — हाथों के मध्य भाग में विद्या और ज्ञान की देवी सरस्वती का वास माना गया है। इसका महत्व यह है कि दिनभर के कार्यों में बुद्धिमानी, विवेक, और सही निर्णय लेने की शक्ति प्राप्त हो।

सुरक्षा और स्थिरता

करमूले तु गोविन्दः — हाथों की जड़ में भगवान विष्णु (गोविन्द) का वास माना गया है, जो सृष्टि के पालनकर्ता हैं। यह विचार सुरक्षा, स्थिरता और मानसिक शांति के लिए प्रार्थना का प्रतीक है।

दिन की सकारात्मक शुरुआत

प्रभाते करदर्शनम् — सुबह उठते ही अपने हाथों के दर्शन करने से यह स्मरण होता है कि आपके जीवन में धन, ज्ञान, और सुरक्षा का महत्व है। यह श्लोक व्यक्ति को यह समझाता है कि दिन की शुरुआत शुभता, सकारात्मकता और प्रेरणा से होनी चाहिए।

स्वावलंबन और कर्म का महत्व

यह श्लोक इस बात का भी प्रतीक है कि इंसान को अपने हाथों से ही सब कुछ प्राप्त करना होता है। लक्ष्मी, सरस्वती, और गोविंद का निवास हमारे हाथों में होना कर्म का महत्व दर्शाता है। इसलिए व्यक्ति को अपने कर्मों पर भरोसा करना चाहिए और अपने कार्यों में ईमानदारी बरतनी चाहिए। यह श्लोक व्यक्ति को जीवन के तीन महत्वपूर्ण पहलुओं — धन, ज्ञान और सुरक्षा — का स्मरण दिलाता है और दिन की सकारात्मक शुरुआत के लिए प्रेरित करता है। यह जीवन में सफलता, समृद्धि, और संतुलन की प्राप्ति का मार्ग दिखाता है।

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