पद्मिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। यह व्रत बहुत ही दुर्लभ और विशेष होता है क्योंकि यह केवल अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पड़ता है। अधिकमास हर तीन साल में एक बार आता है, इसलिए यह व्रत अत्यंत पुण्यदायी और फलदायी माना गया है। इसे करने से सभी पापों का नाश होता है, और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पद्मिनी एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय की बात है, सतयुग में राजा कृतवीर्य अर्जुन अपनी धर्मपत्नी के साथ राज्य में सुख-शांति से शासन कर रहे थे। वे अत्यंत धार्मिक और भगवान विष्णु के परम भक्त थे। लेकिन उन्हें संतान प्राप्ति का सुख नहीं था। इस कारण राजा और उनकी पत्नी दुखी रहते थे। राजा ने संतान प्राप्ति के लिए कई यज्ञ और तप किए, परंतु सफलता नहीं मिली। तब राजा ऋषि अंगिरा के पास गए और अपनी समस्या का समाधान पूछा। ऋषि अंगिरा ने कहा, "हे राजन! अधिकमास के शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी का व्रत करें। यह व्रत अत्यंत फलदायी है और इसे करने से आपकी सभी इच्छाएं पूर्ण होंगी। भगवान विष्णु स्वयं आपकी मनोकामना पूरी करेंगे।" ऋषि के उपदेश के अनुसार, राजा और रानी ने विधिपूर्वक पद्मिनी एकादशी व्रत का पालन किया। व्रत के प्रभाव से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और उन्हें दर्शन दिए। भगवान ने आशीर्वाद दिया, "हे राजन! तुम्हारी सभी इच्छाएं पूर्ण होंगी। तुम्हें तेजस्वी और गुणवान संतान की प्राप्ति होगी।" भगवान विष्णु के आशीर्वाद से राजा और रानी को एक तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई। तभी से यह व्रत संतान सुख, पापों के नाश और मोक्ष की प्राप्ति के लिए किया जाने लगा।पद्मिनी एकादशी व्रत विधि
स्नान और शुद
प्रातःकाल गंगा जल या शुद्ध जल से स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।संकल्प
भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें।पूजा की तैयारी
भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें।पूजन सामग्री
तुलसी दल, फूल, चंदन, धूप, दीपक, फल, और पंचामृत अर्पित करें।मंत्र जाप
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।व्रत कथा श्रवण
पद्मिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।रात्रि जागरण
भगवान विष्णु के नाम का कीर्तन करें और जागरण करें।व्रत का पारण
द्वादशी तिथि को ब्राह्मणों को भोजन कराकर और दान देकर व्रत का पारण करें।
व्रत का महत्व
- यह व्रत सभी प्रकार के पापों को नष्ट करता है।
- व्रतधारी को धन, सुख, समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
- भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष और वैकुंठ की प्राप्ति होती है।
- यह व्रत मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला और जीवन में शांति लाने वाला है।
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"
का जाप और भगवान विष्णु की आराधना इस व्रत को और अधिक शुभ और फलदायी बनाती है।"जय श्री हरि!"
आगामी एकादशी की तिथियाँ
- 29 मार्च 2026, रविवर कामदा एकादशी
- 13 मई 2026, बुधवार अपरा एकादशी
- 27 मई 2026, बुधवार पद्मिनी एकादशी