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ॐ आपदामपहर्तारम् मंत्र – अर्थ, महत्व, लाभ, जप विधि एवं संपूर्ण जानकारी

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ॐ आपदामपहर्तारम् मंत्र

॥ ॐ आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्।
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्॥

Roman Transliteration

Om Apadamapahartaram Dataram Sarva Sampadām।
Lokabhirāmam Srīramam Bhūyo Bhuyo Namāmyaham॥


ॐ आपदामपहर्तारम् मंत्र का अर्थ

यह मंत्र भगवान श्रीराम की स्तुति में अत्यंत प्रसिद्ध और प्रभावशाली श्लोक है।

  • आपदामपहर्तारम् – जो सभी प्रकार की आपदाओं, संकटों और दुखों को दूर करने वाले हैं।
  • दातारम् सर्वसम्पदाम् – जो सभी प्रकार की संपत्ति, सुख, समृद्धि और कल्याण प्रदान करने वाले हैं।
  • लोकाभिरामम् – जो समस्त लोकों के प्रिय और मन को आनंद देने वाले हैं।
  • श्रीरामम् – भगवान श्रीराम।
  • भूयो-भूयो नमाम्यहम् – मैं उन्हें बार-बार प्रणाम करता हूँ।

सरल अर्थ:

"मैं उन भगवान श्रीराम को बार-बार प्रणाम करता हूँ, जो सभी संकटों को दूर करने वाले, समस्त प्रकार की समृद्धि प्रदान करने वाले तथा समस्त संसार के प्रिय हैं।"


ॐ आपदामपहर्तारम् मंत्र का महत्व

यह मंत्र भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत लोकप्रिय माना जाता है। सनातन परंपरा में श्रद्धालु इस मंत्र का जप जीवन की कठिन परिस्थितियों, मानसिक तनाव, भय और चुनौतियों के समय करते हैं।

भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम, धर्म, सत्य, करुणा और आदर्श जीवन का प्रतीक माना जाता है। यह मंत्र उनके दिव्य गुणों का स्मरण कराते हुए भक्त के मन में साहस, धैर्य और विश्वास का संचार करता है।


ॐ आपदामपहर्तारम् मंत्र के लाभ

श्रद्धालुओं की मान्यता के अनुसार इस मंत्र का नियमित जप करने से—

  • जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने का आत्मबल मिलता है।
  • मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
  • भय, चिंता और तनाव में कमी आती है।
  • परिवार में सुख-शांति और सौहार्द बना रहता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति और ईश्वर के प्रति श्रद्धा बढ़ती है।
  • नए कार्यों में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
  • भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त करने की भावना मजबूत होती है।

ध्यान दें: आध्यात्मिक लाभ व्यक्ति की श्रद्धा, नियमित साधना और व्यक्तिगत परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।


इस मंत्र का जप कब करें?

इस मंत्र का जप निम्न अवसरों पर विशेष शुभ माना जाता है—

  • प्रतिदिन प्रातःकाल
  • सायंकाल की पूजा के समय
  • राम नवमी
  • मंगलवार
  • गुरुवार
  • किसी महत्वपूर्ण कार्य से पहले
  • यात्रा प्रारंभ करने से पहले
  • कठिन परिस्थितियों या मानसिक तनाव के समय

ॐ आपदामपहर्तारम् मंत्र जप की विधि

1. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2. भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण एवं हनुमान जी के चित्र या प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं।

3. भगवान श्रीराम का ध्यान करें।

4. श्रद्धा एवं एकाग्रता के साथ मंत्र का जप करें।

5. जप संख्या

  • 11 बार
  • 21 बार
  • 51 बार
  • 108 बार

यदि संभव हो तो तुलसी की माला से जप करना शुभ माना जाता है।


इस मंत्र का आध्यात्मिक संदेश

यह मंत्र हमें यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य, विश्वास और धर्म का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए। भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, करुणा और कर्तव्य का आदर्श है। इस मंत्र का जप व्यक्ति को सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देता है।


कौन कर सकता है इस मंत्र का जप?

यह मंत्र सभी श्रद्धालुओं के लिए उपयुक्त है—

  • विद्यार्थी
  • गृहस्थ
  • नौकरीपेशा व्यक्ति
  • व्यापारी
  • वरिष्ठ नागरिक
  • महिलाएं एवं पुरुष
  • आध्यात्मिक साधना करने वाले

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. ॐ आपदामपहर्तारम् मंत्र किस भगवान का है?

यह मंत्र भगवान श्रीराम को समर्पित है।


2. इस मंत्र का जप कितनी बार करना चाहिए?

11, 21, 51 अथवा 108 बार जप करना शुभ माना जाता है।


3. इस मंत्र का जप किस दिन करना चाहिए?

प्रतिदिन किया जा सकता है। विशेष रूप से मंगलवार, गुरुवार और राम नवमी के दिन इसका जप शुभ माना जाता है।


4. क्या महिलाएं इस मंत्र का जप कर सकती हैं?

हाँ, यह मंत्र सभी श्रद्धालुओं के लिए समान रूप से उपयुक्त है

5. क्या इस मंत्र का जप किसी भी समय किया जा सकता है?

हाँ, हालांकि प्रातःकाल और सायंकाल का समय अधिक शुभ माना जाता है।

ॐ आपदामपहर्तारम् दातारं सर्वसम्पदाम् भगवान श्रीराम की स्तुति का अत्यंत पवित्र और लोकप्रिय मंत्र है। यह मंत्र भक्तों को संकट के समय धैर्य, विश्वास और ईश्वर के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। श्रद्धा और नियमितता के साथ इसका जप मानसिक शांति, आत्मबल और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में सहायक माना जाता है।