रेवती नक्षत्र 27 नक्षत्रों में अंतिम और 27वां नक्षत्र है। यह नक्षत्र शुभता, समृद्धि और आध्यात्मिकता का प्रतीक माना जाता है।
रेवती नक्षत्र का विवरण
चंद्रमा की स्थिति
- रेवती नक्षत्र मीन राशि (Pisces) में आता है।
- यह 16°40' से 30°00' मीन राशि तक फैला होता है।
स्वामी ग्रह
- इस नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध (Mercury) है।
- बुध के प्रभाव से यह नक्षत्र बुद्धिमत्ता, तार्किकता और व्यापारिक गुण प्रदान करता है। ।
देवता
- रेवती नक्षत्र के देवता पुष्यन हैं, जो यात्रा और सुरक्षा के देवता माने जाते हैं।
- इनका आशीर्वाद यात्रा में सफलता और सुरक्षा देता है। ।
प्रतीक
रेवती नक्षत्र का प्रतीक ढेरिया (ढोल या मृदंग) है, जो संगीत, रचनात्मकता और सौम्यता का प्रतीक है।रेवती नक्षत्र के गुणधर्म
प्रकृति
- रेवती नक्षत्र को देव (सात्त्विक) प्रकृति का माना जाता है।
- यह शांति, करुणा और परोपकार का प्रतीक है।
गुण
- इस नक्षत्र के जातक बुद्धिमान, विनम्र और दयालु होते हैं।
- ये लोग कला, संगीत और आध्यात्मिक कार्यों में रुचि रखते हैं।
शुभ कार्य
- रेवती नक्षत्र में विवाह, गृह प्रवेश, नई परियोजनाओं की शुरुआत और शिक्षा से संबंधित कार्य शुभ माने जाते हैं।
- इस नक्षत्र में यात्रा करना अत्यंत लाभकारी होता है।
अशुभ समय
- इस नक्षत्र में केवल अत्यधिक कठिन या विवादास्पद कार्यों से बचना चाहिए।
रेवती नक्षत्र के जातक के गुण
- ये लोग शांतिप्रिय और उदार स्वभाव के होते हैं।
- इनमें नेतृत्व और मार्गदर्शन की अद्भुत क्षमता होती है।
- रचनात्मकता और कल्पनाशक्ति में ये आगे रहते हैं।
- ये जीवन में दूसरों की भलाई के लिए प्रयासरत रहते हैं।
रेवती नक्षत्र के दोष और उपाय
दोष
- चूंकि इसका स्वामी बुध है, बुध से जुड़े दोष या अशुभ प्रभाव हो सकते हैं।
- कभी-कभी इन जातकों में आत्मविश्वास की कमी हो सकती है।
उपाय
- बुध ग्रह की शांति के लिए बुधवार का व्रत करें।
- "ॐ बुं बुधाय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें।
- भगवान विष्णु की पूजा करें और गाय को हरा चारा खिलाएं।