या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता | नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्य भिधीयते। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धि-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु निद्रा-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु क्षुधा-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु छाया-रुपेण संस्थिता | नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु तृष्णा-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषू क्षान्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषू जाति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषू लज्जा-रुपेण संस्थिता | नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु शांति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धा-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषू कान्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मी-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु व्रती-रुपेणना संस्थिता | नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु स्मृती-रुपेण संस्थिता | नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु दया-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टि-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु मातृ-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु भ्राँति-रूपेण संस्थिता | नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
इन्द्रियाणा मधिष्ठात्री भूतानां चाखिलेषु या | भूतेषु सततं तस्यै व्याप्तिदेव्यै नमो नमः ||
चितिरुपेण या कृत्स्नम एतत व्याप्य स्थितः जगत नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
यह मंत्र शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक है
- जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है
- नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है
- आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाता है
जप के लाभ
- भय और नकारात्मकता दूर होती है
- आत्मबल और हिम्मत बढ़ती है
- मानसिक शांति मिलती है
- जीवन में शुभता और सफलता आती है
जप विधि
- सुबह या शाम शांत स्थान पर बैठें
- देवी दुर्गा का ध्यान करें
- मंत्र का 11 या 108 बार जप करें
कब करें जप?
- रोज सुबह-शाम
- विशेष रूप से नवरात्रि में
- किसी भी डर या परेशानी के समय
निष्कर्ष
“या देवी सर्वभूतेषु…” मंत्र हमें याद दिलाता है किशक्ति हमारे अंदर ही मौजूद है, बस उसे जागृत करने की जरूरत है।