जय सिद्धिदात्री , ओम जय सिद्धिदात्री ।
सर्व सुखो की जननी , रिद्धि सिद्धिदात्री ।।
ओम जय सिद्धिदात्री ।।अनिमा गरिमा लघिमा , सिद्धि तिहारी हाथ ।
तू अविचल महामाई , त्रिलोकी की नाथ ।।
ओम जय सिद्धिदात्री ।।
शुम्भ निशुम्भ विडारे , जग है प्रसिद्ध गाथा ।
शास्त्र भुजा यानि धरक , चक्र लियो हाथा ।।
ओम जय सिद्धिदात्री ।।
तेरी दया बिन रिद्धि , सिद्धि न हो पाती ।
सुख समृद्धि देती , तेरी दया पाती ।।
ओम जय सिद्धिदात्री ।।
दुःख दरिद्र विनाशिनी , दोष सभी हरना ।
दुर्गुणों को संघारके , पावन माँ करना ।।
ओम जय सिद्धिदात्री ।।
नवदुर्गो में मैया , नवम तेरा स्थान ।
नौवे नवरात्रे को , करे सब ध्यान ।।
ओम जय सिद्धिदात्री ।।
तुम ही जग की माता , तुम ही हो भरता ।
भक्तो की दुःख हरता , सुख संपत्ति करता ।।
ओम जय सिद्धिदात्री ।।
अगर कपूर की ज्योति , आरती तुम गाये ।
छोड़ के तेरा द्वार , और कहा जाये ।।
ओम जय सिद्धिदात्री ।।
सिद्धिदात्री माता , सब दुर्गुण हरना ।
अपना जान के मैया , हमपे कृपा करना ।।
ओम जय सिद्धिदात्री ।।
जय सिद्धिदात्री , ओम जय सिद्धिदात्री ।
सर्व सुखो की जननी , रिद्धि सिद्धिदात्री ।।
ओम जय सिद्धिदात्री ।।