ॐ जय साईनाथ जय साईनाथ , आदि ऩा अंत तुम्हारा तुम्हे श्रधा नमन हमारा ।
धरती पर रहकर प्रभु तुमने, तन अंबर तक विस्तारा ।
ॐ जय साईनाथ जय साईनाथ आदि ऩा अंत तुम्हारा तुम्हे श्रधा नमन हमारा ॥(1)
साई राम साई श्याम, दुःख भंजन तेरौ नाम ।
हे साई नाथ तेरे आने से हुआ ,धन्य ये धरती धाम धाम ।
ॐ जय साईनाथ जय साईनाथ आदि ऩा अंत तुम्हारा तुम्हे श्रधा नमन हमारा
धरती पर रहकर प्रभु तुमने तन अंबर तक विस्तारा
ॐ जय साईनाथ जय साईनाथ आदि ऩा अंत तुम्हारा तुम्हे श्रधा नमन हमारा
ईश्वरीय आलोक लिए, प्रभु मानव रूप धरे हो ।
चमत्कार ही चमत्कार से, तुम संपूर्ण भरे हो ।
चमत्कार ही चमत्कार से, तुम संपूर्ण भरे हो ।
सौभाग्य जुड़े तब दशॅऩ का सौभाग्य मीले सुखकारा ॥
ॐ जय साईनाथ जय साईनाथ , आदि ऩा अंत तुम्हारा, तुम्हे श्रधा नमन हमारा ।
ॐ जय साईनाथ जय साईनाथ आदि ऩा अंत तुम्हारा तुम्हे श्रधा नमन हमारा ।
हम तो तुमसे जुड़कर बेठे, नाते दुनिया वाले ।
रूप विराट दिखाकर तुमने मन अचरज मै ड़ाले ।
साईं नाथ हमे फिर लोटा दो, वही सहज रूप मनहारा ॥
ॐ जय साईनाथ जय साईनाथ आदि ऩा अंत तुम्हारा तुम्हे श्रधा नमन हमारा ।
ॐ जय साईनाथ जय साईनाथ आदि ऩा अंत तुम्हारा तुम्हे श्रधा नमन हमारा ।
श्री साईनाथ आरती – महत्व, अर्थ और लाभ
“ॐ जय साईनाथ जय साईनाथ…” साई बाबा की यह आरती भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। यह केवल एक भजन नहीं, बल्कि श्रद्धा और सबुरी का संदेश देने वाली दिव्य स्तुति है।आरती का आध्यात्मिक अर्थ
“आदि ना अंत तुम्हारा…” का अर्थ है किसाईनाथ अनंत हैं — उनका न कोई आरंभ है न अंत।
यह आरती हमें सिखाती है:
- पूर्ण समर्पण (Surrender)
- सबुरी (Patience)
- श्रद्धा (Faith)
साईनाथ आरती का महत्व
- जीवन में शांति और संतुलन लाती है
- दुख और संकट में मानसिक शक्ति देती है
- भक्ति मार्ग पर स्थिरता प्रदान करती है
- साई बाबा मंदिर में यह आरती विशेष रूप से प्रसिद्ध है
आरती करने की विधि
- साई बाबा की मूर्ति/चित्र स्थापित करें
- दीपक और अगरबत्ती जलाएं
- फूल और प्रसाद (फल/मिठाई) अर्पित करें
- श्रद्धा से आरती गाएं
- अंत में “ॐ साई राम” का जाप करें
आरती के लाभ
- मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जाआर्थिक और पारिवारिक स्थिरता
- संकट और नकारात्मकता से रक्षा
- मनोकामना पूर्ति
आरती का शुभ समय
- प्रातः काल (काकड़ आरती)
- सायं काल (धूप आरती)
- रात्रि (शेज आरती)