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भजन

रघु नंदन रघु रघु नंदन भजन: संपूर्ण पाठ, अर्थ और महत्व

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“रघु नंदन रघु रघु नंदन, रघुवर सेवन रघुपति चयन” भगवान श्रीराम की महिमा और उनके पराक्रमी भक्त श्री हनुमान जी की भक्ति से जुड़ा एक भक्तिमय भजन है। इस भजन में श्रीराम के प्रति प्रेम, हनुमान जी की शक्ति, उनके अद्भुत पराक्रम और लंका की ओर किए गए उनके महान कार्यों का भाव दिखाई देता है।

भजन में हनुमान जी द्वारा समुद्र लांघने, शत्रुओं के मद का नाश करने और रावण जैसे शक्तिशाली राजा को कंपित कर देने वाले उनके पराक्रम का वर्णन किया गया है। श्रीराम और हनुमान जी की भक्ति में डूबा यह भजन भक्तों के मन में साहस, श्रद्धा और आत्मविश्वास की भावना जागृत करता है।

रघु नंदन रघु रघु नंदन भजन का पाठ

राम राम जय राम राम
राम राम जय राम राम
राम राम जय राम राम
राम राम जय राम राम
राम..

रघु नंदन रघु रघु नंदन
रघुवरसेवना रघुपतिचयन

सत्ययोजना सततसत्ययोजना
शरदिनियाजना शारपरिलंघना

रघु नंदन रघु रघु नंदन
रघुवरसेवना रघुपतिचायन

सत्ययोजना सततसत्ययोजना
शरदिनियाजना शारपरिलंघन में

अरी भजन अरी अरी भजन
अरिमद्भजन दशमुख कम्पन

बड़ बकृता बड़बड़ बकृता
बदबनलाकृता बहुभस्मर्चना

जया केतन जया जया केतन
जयहया प्रपुना
जयमिड़ धापुगाने

रघु नंदन भजन का भावार्थ

इस भजन में भगवान श्रीराम, जिन्हें रघुनंदन और रघुवर कहा गया है, की महिमा का स्मरण किया जाता है। साथ ही हनुमान जी के अद्भुत पराक्रम का वर्णन मिलता है।

“रघु नंदन” भगवान श्रीराम के लिए प्रयुक्त संबोधन है। श्रीराम रघुवंश में जन्म लेने के कारण रघुनंदन और रघुवर कहलाते हैं।

भजन में हनुमान जी के उस महान पराक्रम की ओर संकेत मिलता है जब उन्होंने श्रीराम के कार्य के लिए विशाल समुद्र को लांघकर लंका की ओर प्रस्थान किया। यह प्रसंग हनुमान जी की असीम शक्ति, साहस और श्रीराम के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

भजन में दशमुख अर्थात रावण के मद और अहंकार को चुनौती देने वाले हनुमान जी के पराक्रम का भी स्मरण किया गया है।

रघुनंदन और हनुमान जी का संबंध

भगवान श्रीराम और हनुमान जी का संबंध भारतीय भक्ति परंपरा में आदर्श माना जाता है। हनुमान जी ने अपने जीवन को श्रीराम की सेवा के लिए समर्पित किया।

रामायण में हनुमान जी की भक्ति, बुद्धि, शक्ति और विनम्रता के अनेक प्रसंग मिलते हैं। समुद्र लांघना, माता सीता की खोज करना, लंका में श्रीराम का संदेश पहुंचाना और संजीवनी बूटी लाना उनके प्रमुख पराक्रमों में गिने जाते हैं।

इसीलिए हनुमान जी को श्रीराम के परम भक्त और सेवक के रूप में पूजा जाता है।

भजन में समुद्र लांघने का प्रसंग

भजन में समुद्र लांघने के प्रसंग का विशेष भाव दिखाई देता है। रामायण की कथा के अनुसार माता सीता की खोज के लिए हनुमान जी को समुद्र पार करके लंका जाना था।

श्रीराम के कार्य को पूरा करने के संकल्प के साथ हनुमान जी ने अपनी शक्ति को पहचाना और विशाल समुद्र को पार किया। यह प्रसंग भक्तों को यह संदेश देता है कि दृढ़ संकल्प, भक्ति और आत्मविश्वास से कठिन से कठिन लक्ष्य की ओर आगे बढ़ा जा सकता है।

रघु नंदन भजन का धार्मिक महत्व

भगवान श्रीराम और हनुमान जी की भक्ति से जुड़े भजनों का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। इस प्रकार के भजन सुनने या गाने से भक्त का मन भगवान के प्रति एकाग्र करने में सहायता मिल सकती है।

विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा के दौरान श्रीराम और हनुमान जी से जुड़े भजन गाने की परंपरा कई भक्तों में प्रचलित है।

रघु नंदन भजन कब सुनें या गाएं?

इस भजन को अपनी श्रद्धा के अनुसार किसी भी समय सुना या गाया जा सकता है। विशेष रूप से निम्न अवसरों पर इसका पाठ या गायन किया जा सकता है:

  • मंगलवार को हनुमान जी की पूजा में

  • शनिवार को हनुमान आराधना के समय

  • श्रीराम नवमी के अवसर पर

  • हनुमान जयंती पर

  • राम मंदिर या हनुमान मंदिर में भजन-कीर्तन के समय

  • घर में दैनिक पूजा के दौरान

  • भजन और संकीर्तन के अवसर पर

रघु नंदन भजन से मिलने वाली प्रेरणा

इस भजन का मूल भाव भक्ति, सेवा, साहस और समर्पण से जुड़ा है। हनुमान जी का चरित्र भक्तों को यह प्रेरणा देता है कि कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटना चाहिए।

श्रीराम के प्रति हनुमान जी की निष्ठा यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति में अहंकार का त्याग और सेवा की भावना महत्वपूर्ण है।

श्रीराम और हनुमान जी की आराधना

भजन के दौरान भक्त श्रीराम और हनुमान जी का ध्यान कर सकते हैं। पूजा में श्रीराम का नाम-स्मरण, हनुमान चालीसा का पाठ या “ॐ हनुमते नमः” मंत्र का जाप भी अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार किया जा सकता है।

“रघु नंदन रघु रघु नंदन” भजन श्रीराम और हनुमान जी की भक्ति, सेवा और पराक्रम की भावना को सामने लाता है। इसमें रघुनंदन श्रीराम की महिमा के साथ हनुमान जी के अद्भुत साहस और श्रीराम के प्रति उनके समर्पण का स्मरण किया गया है।

श्रीराम और हनुमान जी की भक्ति से जुड़े भजन मन को भक्तिभाव से जोड़ने और आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त करने का सुंदर माध्यम हैं।

जय श्रीराम।
जय हनुमान।